उत्तराखंड में GST नियमों को मिलेगी नई कानूनी मजबूती, कारोबारियों को छूट और रिफंड में राहत का रास्ता साफ
देहरादून। बिक्री के बाद ग्राहकों को दी जाने वाली छूट से लेकर जीएसटी रिफंड तक, कारोबारियों से जुड़े तीन अहम प्रावधानों को कानूनी रूप देने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल ने जीएसटी संशोधनों को विधानसभा में विधेयक के रूप में पेश करने का रास्ता साफ कर दिया है। इससे कारोबारियों के लिए कर संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाने और कार्यशील पूंजी की समस्या कम करने की उम्मीद है।
केंद्र के केंद्रीय माल एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 में किए गए बदलावों के अनुरूप उत्तराखंड माल एवं सेवा कर अधिनियम में संशोधन किए गए हैं। इस संबंध में तीन सितंबर 2026 को अध्यादेश जारी किया गया था। अब इन प्रावधानों को विधेयक के माध्यम से विधानसभा के सामने रखा जाएगा, ताकि उन्हें विधायी मंजूरी मिल सके।
बिक्री के बाद छूट देने में कम होंगी कानूनी अड़चनें
जीएसटी नियमों में प्रस्तावित बदलाव का सीधा संबंध उन कारोबारियों से है, जो बिक्री पूरी होने के बाद ग्राहकों को छूट देते हैं। पहले ऐसी छूट पर कर योग्य मूल्य कम करने का लाभ लेने के लिए आपूर्ति से पहले या उसी समय समझौता होना और छूट का संबंधित बिलों से जुड़ा होना जरूरी था।
संशोधन के तहत पूर्व समझौते की इस अनिवार्यता को हटाया गया है। अब निर्धारित शर्तें पूरी होने पर कारोबारी क्रेडिट नोट जारी कर बिक्री के बाद दी गई छूट का लाभ दे सकेंगे। हालांकि, जहां नियम लागू होंगे, वहां ग्राहक को संबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट वापस करना होगा।
इस बदलाव से व्यापारिक परिस्थितियों के अनुसार छूट देने वाले कारोबारियों को राहत मिलने और कर संबंधी औपचारिकताओं में आसानी होने की उम्मीद है।
क्रेडिट नोट जारी करने की व्यवस्था में भी बदलाव
जीएसटी अधिनियम की धारा 34 में क्रेडिट और डेबिट नोट जारी करने के प्रावधान हैं। इसमें संशोधन का उद्देश्य बिक्री के बाद दी जाने वाली छूट और क्रेडिट नोट की प्रक्रिया के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।
इससे कारोबारियों को छूट से जुड़े लेनदेन का हिसाब रखने और संबंधित कर प्रक्रियाओं का पालन करने में सुविधा मिल सकती है।
कच्चे माल पर ज्यादा टैक्स तो रिफंड में मिलेगी राहत
सरकार के इस कदम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उलटी कर संरचना यानी इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से जुड़ा है। यह स्थिति तब बनती है, जब तैयार उत्पाद की तुलना में कच्चे माल पर जीएसटी की दर अधिक होती है। ऐसे में निर्माता के पास इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा होता रहता है, जिसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता और पूंजी लंबे समय तक कारोबार में फंसी रहती है।
संशोधन के तहत पात्र रिफंड दावों में अनंतिम रिफंड की सुविधा का विस्तार किया गया है। निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले कारोबारियों को रिफंड दावे की पात्र राशि का 90 प्रतिशत तक अग्रिम भुगतान मिल सकता है।
इससे निर्माताओं को कारोबार के लिए जरूरी नकदी उपलब्ध कराने, पूंजी की उपलब्धता बेहतर करने और वित्तीय दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
विधानसभा की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
जीएसटी से जुड़े इन तीन संशोधनों का उद्देश्य बिक्री के बाद छूट, क्रेडिट नोट और रिफंड व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाना है। मंत्रिमंडल के फैसले के बाद अब विधेयक को विधानसभा में पेश कर विधायी प्रक्रिया पूरी करने का रास्ता खुल गया है। इन प्रावधानों का लाभ संबंधित नियमों और निर्धारित पात्रता शर्तों के अनुसार मिलेगा।


