पहाड़ों के सीने को चीरकर दौड़ेगी ट्रेन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर

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देहरादून। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सफर की तस्वीर बदलने की दिशा में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अहम साबित होने जा रही है। करीब 125 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने से पहाड़ों तक रेल पहुंचने का सपना साकार होगा। परियोजना के तहत 12 रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जबकि रेल लाइन का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन सुगम होने के साथ सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने की उम्मीद है।

सुरंगों के भीतर तैयार हो रहा रेल सफर का रास्ता

हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच रेल लाइन बिछाना इंजीनियरिंग की बड़ी चुनौती है। पहाड़ों की ऊंचाई, चट्टानों और दुर्गम रास्तों को देखते हुए परियोजना में बड़े पैमाने पर सुरंगों और पुलों का निर्माण किया जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर इस परियोजना को उत्तराखंड के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

परियोजना के तहत मुख्य सुरंगों के साथ आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षित निकासी के लिए एस्केप टनल भी बनाई जा रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 16 मुख्य सुरंगों में से 13 और 12 एस्केप सुरंगों में से 10 का आर-पार निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अलावा आठ बड़े और 30 छोटे पुलों का निर्माण भी पूरा बताया गया है।

पर्यटन और तीर्थाटन को मिलेगी नई रफ्तार

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को केवल परिवहन सुविधा के तौर पर नहीं, बल्कि उत्तराखंड के आर्थिक और पर्यटन विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेल संपर्क बेहतर होने से चारधाम यात्रा और दूसरे धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले यात्रियों को भविष्य में सुविधा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्थानीय कारोबार, होटल व्यवसाय और रोजगार के नए अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी परियोजना को राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि इससे पर्यटन, तीर्थाटन और रोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से पर्वतीय क्षेत्रों का देश के दूसरे हिस्सों से संपर्क मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।

ऋषिकेश में शुरू हो चुका है रेल नेटवर्क का विस्तार

इस परियोजना के तहत ऋषिकेश से वीरभद्र और योगनगरी ऋषिकेश के बीच करीब पांच किलोमीटर लंबा रेलखंड वर्ष 2020 में पूरा हो चुका था। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का काम भी पूरा बताया गया है।

कुल मिलाकर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। अब इस परियोजना के शेष निर्माण कार्यों को पूरा करना अहम होगा, ताकि पहाड़ों में रेल यात्रा का लाभ स्थानीय लोगों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों तक पहुंच सके।

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