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भारतीय सनातन परंपरा में नववर्ष Hindu Nav Varsh 2026 का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है, जिसे नवसंवत्सर या हिंदू नववर्ष कहा जाता है। इस वर्ष पंचांग गणना के अनुसार 19 मार्च 2026 से हिंदू नववर्ष का शुभारंभ माना जा रहा है। इसी के साथ विक्रम संवत 2083 प्रारंभ हो जाएगा, जबकि अब तक विक्रम संवत 2082 चल रहा था।नवसंवत्सर केवल नए वर्ष की शुरुआत नहीं बल्कि नई ऊर्जा, नए संकल्प और नवजीवन का प्रतीक है। चैत्र माह के आगमन के साथ ही प्रकृति में भी बदलाव दिखाई देने लगता है। पेड़ों पर नई कोंपलें, फूलों की खुशबू और वातावरण में ताजगी जीवन में सकारात्मक बदलाव का संदेश देती है।

धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृजन कार्य का आरंभ किया था। इसलिए इस तिथि को अत्यंत शुभ माना जाता है। लोग इस दिन घरों की साफ-सफाई कर पूजा-अर्चना करते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और नए कार्यों की शुरुआत करते हैं।देश के विभिन्न हिस्सों में हिंदू नववर्ष को अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इसे Gudi Padwa 2026गुड़ी पड़वा, दक्षिण भारत में उगादी, और उत्तर भारत में नवसंवत्सर के रूप में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है।

नवसंवत्सर हमें प्रेरणा देता है कि हम बीते समय की गलतियों से सीख लें और नए वर्ष में सकारात्मक सोच, सेवा भाव और अनुशासन के साथ आगे बढ़ें। यह पर्व प्रकृति से जुड़ने, आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनने और समाज के विकास में योगदान देने का संदेश भी देता है।

आइए, विक्रम संवत 2083 के इस पावन अवसर पर हम सभी नई उम्मीदों और उत्साह के साथ हिंदू नववर्ष का स्वागत करें।

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