धराली आपदा के बाद जागी उम्मीद, मलबे में दबे कल्प केदार मंदिर की खोज शुरू
उत्तरकाशीः उत्तरकाशी जिले के धराली में आई विनाशकारी आपदा के बाद मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर को फिर से खोजने की कवायद शुरू हो गई है। नवरात्रि के पहले दिन ग्रामीणों ने आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। हवन के बाद देवता की ओर से निर्धारित समय पर मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए खुदाई शुरू की गई। करीब 100 साल के अंतराल के बाद एक बार फिर इस प्राचीन धरोहर को खोजने की कोशिश की जा रही है।
धराली में पिछले वर्ष अगस्त में आई आपदा के कारण कल्प केदार मंदिर मलबे में दब गया था। ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर करीब 25 फीट नीचे दबा हुआ है। अब मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने अपने संसाधनों के माध्यम से इसकी खोज का काम शुरू किया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि खुदाई के जरिए मंदिर के अस्तित्व और उसके ऐतिहासिक स्वरूप को फिर से सामने लाया जा सकेगा।
इतिहास में चौथी बार मंदिर की खोज
कल्प केदार मंदिर का इतिहास प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ा रहा है। मंदिर समिति के सदस्यों के मुताबिक, इतिहास में चौथी बार मंदिर को खोजने के लिए खुदाई की जा रही है। बुजुर्गों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 1803 में आई आपदा के दौरान बाढ़ में मंदिर बह गया था। उस समय इस क्षेत्र में करीब 204 मंदिरों का समूह होने की बात कही जाती है।
इसके बाद वर्ष 1887 में यहां तीन मंदिर दिखाई दिए थे। वर्ष 1926 में आई आपदा के दौरान मुख्य कल्प केदार मंदिर का एक हिस्सा जमीन में दब गया, जबकि अन्य छोटे मंदिर बह गए थे। बाद में ग्रामीणों ने खुदाई कर मुख्य मंदिर को बाहर निकाला था। अब लगभग एक सदी बाद वर्ष 2025 में आई आपदा ने मंदिर को फिर से मलबे के नीचे दबा दिया है।
मुख्यमंत्री ने की है जीर्णोद्धार की घोषणा
कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार ने बताया कि समेश्वर देवता के आदेश और सानिध्य में ग्रामीणों ने अपने स्तर पर खुदाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री की ओर से भी मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा की गई है। इस संबंध में जल्द ही समिति का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा।
आस्था के साथ विरासत को बचाने की पहल
कल्प केदार मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि धराली के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का भी प्रतीक माना जाता है। आपदा के बाद मंदिर को दोबारा खोजने की यह पहल स्थानीय लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है। अब सभी की नजरें खुदाई पर टिकी हैं। यदि मंदिर को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने में सफलता मिलती है, तो यह क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


