फर्जी फोटो और भ्रामक सूचनाओं की कैसे करें पहचान? महाविद्यालय में विशेषज्ञों ने दिए टिप्स
विशेषज्ञों ने फोटो और वीडियो की वास्तविकता पहचानने से लेकर एआई, डिजिटल डिटॉक्स और साइबर कानूनों तक की दी जानकारी
नरेंद्रनगर। डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच सही और गलत सूचनाओं की पहचान करना आज बड़ी चुनौती बन गया है। सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाली भ्रामक खबरों, फर्जी तस्वीरों और साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल के साथ ही तकनीक के दुरुपयोग से बचने के तरीके बताए।

मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के तहत महाविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से सोमवार को कॉलेज के रूसा सभागार में हाइब्रिड मोड में कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख नरेंद्रनगर दीक्षा राणा, जिला पंचायत सदस्य टिहरी हुकुम सिंह भंडारी, महाविद्यालय के प्राचार्य और अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में न्यूज़ पोटली के संचालक अरविंद शुक्ला ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल मीडिया की भूमिका और इसके गलत इस्तेमाल पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध तस्वीरों और सामग्री की वास्तविकता की जांच करना बेहद जरूरी है। इस दौरान प्रतिभागियों को असली और संपादित तस्वीरों तथा कंटेंट के बीच अंतर पहचानने के तरीके भी समझाए गए।

मनोविज्ञान विभाग की प्राध्यापिका डॉ. रंजीत जौहरी ने डिजिटल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए समय-समय पर डिजिटल डिटॉक्स अपनाना चाहिए। साथ ही किसी भी तरह के डिजिटल संकट या परेशानी की स्थिति में अपने परिवार और बुजुर्गों से बात करने की सलाह दी।
ऑनलाइन माध्यम से जुड़ी राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान, हैदराबाद की विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा शुक्ला ने मिसइन्फॉर्मेशन, डिसइन्फॉर्मेशन, डिजिटल लिटरेसी बिल और मॉर्फ की गई तस्वीरों की पहचान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और क्लाउड कंप्यूटिंग की उपयोगिता एवं चुनौतियों से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया।
वहीं, वर्चुअल माध्यम से शामिल कानूनी विशेषज्ञ अनन्या मिश्रा ने डिजिटल मीडिया से जुड़े साइबर कानूनों और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले अपराधों के मामलों में कानूनी पहलुओं को समझाया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विजय सिंह नेगी ने साइबर अपराधों और फर्जी सूचनाओं के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गलत सूचनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और साइबर अपराधों के समाधान के लिए जागरूकता के साथ ठोस प्रयास जरूरी हैं।

मुख्य अतिथि दीक्षा राणा ने सोशल मीडिया के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि लोगों को किसी भी सूचना पर भरोसा करने से पहले उसके स्रोत की विश्वसनीयता जांचनी चाहिए। जिला पंचायत सदस्य हुकुम सिंह भंडारी ने भी डिजिटल मीडिया के रचनात्मक और सकारात्मक उपयोग पर जोर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों का प्लांटर और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यशाला की संयोजक डॉ. सृचना सचदेवा ने स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन किया, जबकि संचालन डॉ. जितेंद्र नौटियाल ने किया। इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापक डॉ. विक्रम सिंह बर्त्वाल, विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधि, महाविद्यालय के कर्मचारी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


