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ऋषिकेश: उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानियों की एक आवश्यक बैठक को आईएसबीटी परिसर, ऋषिकेश स्थित राज्य निर्माण सेनानी शहीद स्मारक में आयोजित की गई। बैठक में देश और प्रदेश से जुड़े समसामयिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए।

बैठक में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए यूजीसी (UGC) कानून पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक का स्वागत किया गया। राज्य निर्माण सेनानियों ने इस निर्णय के लिए सर्वोच्च न्यायालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला लोकतंत्र और जनहित की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वक्ताओं ने केंद्र सरकार से मांग की कि यूजीसी कानून में जो भी खामियां हैं, उन पर गंभीरता से पुनर्विचार किया जाए और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए आवश्यक संशोधन किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना होना चाहिए, न कि उसे विवादों में उलझाना।

बैठक के दौरान तथाकथित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी की भी कड़े शब्दों में निंदा की गई। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की टिप्पणी राष्ट्रवादी सोच और सनातन परंपरा को ठेस पहुंचाने वाली है। उन्होंने इसे देवभूमि उत्तराखंड को शर्मसार करने वाला बयान बताया और कहा कि ऐसे वक्तव्य समाज में वैमनस्य फैलाने का कार्य करते हैं।

राज्य निर्माण सेनानियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जो लोग सनातन की आड़ लेकर सनातन के विरुद्ध ही कार्य कर रहे हैं, वे समाज और राष्ट्र के लिए घातक सिद्ध हो रहे हैं। बैठक में सर्वसम्मति से मांग की गई कि सनातन धर्म और राष्ट्र विरोधी टिप्पणी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के बयान न दिए जा सकें।

बैठक में मुख्य रूप से शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष डी.एस. गुसाईं, बलवीर सिंह नेगी, गंभीर सिंह मेवाड़, गुलाब सिंह रावत, युद्धवीर सिंह चौहान, राजेंद्र कोठारी, विशंभर दत्त डोभाल, हरि सिंह नेगी, प्रेम सिंह रावत, महेंद्र बिष्ट, रामेश्वरी चौहान, उर्मिला डबराल, भगवती चमोली, राम उनियाल, सुरेंद्र सिंह, रविंदर कौर, लक्ष्मी बूढ़ा कोठी, शीला ध्यानी, पूर्णिमा भट्ट, सतीश्वरी बिष्ट, पूर्ण राणा सहित सैकड़ों राज्य निर्माण सेनानी उपस्थित रहे।

बैठक की अध्यक्षता बलवीर सिंह नेगी ने की, जबकि संचालन डी.एस. गुसाईं द्वारा किया गया। बैठक के अंत में राज्य निर्माण सेनानियों ने एकजुट होकर जनहित, राष्ट्रहित और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लिया।

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