गर्भवती के साथ अमानवीय व्यवहार, महिला आयोग ने जताई चिंता
हरिद्वार: 1 अक्टूबर 2025 हरिद्वार के महिला अस्पताल में एक गर्भवती महिला को भर्ती करने से मना करने और उसके साथ अमानवीय व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने इस गंभीर घटना का स्वतः संज्ञान लिया है और जांच के आदेश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल में भर्ती न किए जाने के कारण महिला प्रसूता को फर्श पर तड़पते हुए बच्चे को जन्म देना पड़ा। आरोप है कि अस्पताल में तैनात डॉक्टरों ने न केवल महिला की मदद करने से इनकार किया, बल्कि आशा वर्कर को ही फर्श साफ करने के लिए कहा। परिजनों के अनुसार, जब आशा वर्कर ने पूरे प्रकरण का वीडियो बनाने का प्रयास किया, तो अस्पताल स्टाफ ने उसका फोन छीनने की कोशिश की।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा, “गर्भवती के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। यदि अस्पताल में तैनात चिकित्सकों या कर्मचारियों द्वारा किसी के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह पूरी तरह निंदनीय है।

अध्यक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग की सदस्य और सीएमओ आर.के. सिंह व कमल जोशी को जांच के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों और संबंधित स्टाफ के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मामले ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में भी चिंता पैदा कर दी है। नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महिला अस्पताल में हुई इस घटना की निंदा की है और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।
महिला आयोग ने कहा कि ऐसे मामलों के प्रति आयोग संवेदनशील रहेगा और गर्भवती महिलाओं तथा माताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।
