हल्द्वानी के एमबी पीजी कॉलेज में आर्कियोलॉजी विषय पर व्याख्यान आयोजित

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हल्द्वानी : एमबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय हल्द्वानी के इतिहास विभाग द्वारा “आर्कियोलॉजी एक्सप्लोरेशन – टूल्स एंड मेथड” विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर इंडोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. नीता दुबे ने मुख्य वक्ता के रूप में पुरातत्व के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी साझा की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज्योति टम्टा द्वारा किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए डॉ. ज्योति टम्टा ने विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुरातत्व (आर्कियोलॉजी) केवल अतीत की घटनाओं को जानने का माध्यम ही नहीं है, बल्कि यह हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत और इतिहास को समझने तथा उसे संरक्षित करने के लिए भी प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि पुरातत्व के माध्यम से हमें अपने प्राचीन इतिहास की समृद्धता और गौरवशाली परंपराओं का ज्ञान होता है, जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आर्कियोलॉजी के अंतर्गत दस्तावेजों के संकलन और उनके अध्ययन की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

मुख्य वक्ता डॉ. नीता दुबे ने अपने व्याख्यान में आर्कियोलॉजी के विभिन्न प्रकारों और इसके अध्ययन की आठ प्रमुख चरणों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि पुरातात्विक अनुसंधान के दौरान वैज्ञानिक तरीकों और विशेष उपकरणों का उपयोग किया जाता है, जिससे किसी भी स्थल के ऐतिहासिक महत्व और उससे जुड़े तथ्यों का सटीक अध्ययन किया जा सके। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा इन अध्ययनों के लिए विभिन्न नियम और कानून निर्धारित किए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होता है।

डॉ. दुबे ने बताया कि आर्कियोलॉजी का अध्ययन केवल ऐतिहासिक अवशेषों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सांस्कृतिक धरोहर, पर्यावरण, एंथ्रोपोलॉजी (मानव विज्ञान), वनस्पति विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे कई विषयों पर भी महत्वपूर्ण शोध किए जा सकते हैं। इस प्रकार पुरातत्व एक बहुआयामी विषय है, जो विभिन्न क्षेत्रों के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. बी.आर. पंत ने अपने संबोधन में डॉ. नीता दुबे के व्याख्यान की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के ज्ञानवर्धक और रचनात्मक कार्यक्रम विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने इतिहास विभाग को इस महत्वपूर्ण व्याख्यान के सफल आयोजन के लिए बधाई भी दी।

कार्यक्रम के अंत में इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश टम्टा ने मुख्य वक्ता, सभी प्राध्यापकों तथा प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं।इस संगोष्ठी में डॉ. राजेश कुमार, डॉ. महिपाल कोटियाल, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. देवेश गर्बयाल, डॉ. नवल लोहनी, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. सुधीर नैनवाल सहित स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।

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