एम्स ऋषिकेश में ‘लिविंग कैनवस’ बाॅडी पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित

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ऋषिकेश : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के एनाटॉमी विभाग द्वारा आयोजित बाॅडी पेंटिंग प्रतियोगिता में मेडिकल छात्रों ने मानव शरीर रचना और शरीर क्रिया विज्ञान को रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत कर सबका ध्यान आकर्षित किया। ‘लिविंग कैनवस’ थीम पर आधारित इस अनूठी प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रथम वर्ष के एमबीबीएस छात्रों को एनाटॉमी की जटिल अवधारणाओं को सरल और प्रभावी ढंग से समझाना था।

प्रतियोगिता में कुल 125 छात्रों ने भाग लिया, जिन्हें 25 समूहों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक समूह को अलग-अलग एनाटॉमिकल टॉपिक्स दिए गए, जिन्हें उन्होंने रंगों और कला के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। छात्रों ने मांसपेशियों की संरचना, तंत्रिका तंत्र, हृदय एवं रक्त संचार प्रणाली सहित विभिन्न विषयों को मानव शरीर पर उकेर कर सीखने की अभिनव पहल की। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियां छात्रों के बौद्धिक और व्यावहारिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि इंटरैक्टिव और अनुभवात्मक लर्निंग भी अत्यंत आवश्यक है।

डीन एकेडमिक्स प्रो. सौरभ वार्ष्णेय ने एनाटॉमी को मेडिकल एजुकेशन की नींव बताते हुए कहा कि सक्रिय शिक्षण पद्धतियों से विषय की गहराई को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के नवाचारपूर्ण कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीओ ऋषिकेश नीरज सेमवाल तथा विशिष्ट अतिथि स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की नोडल अधिकारी डॉ. बिमलेश जोशी ने प्रतियोगिता के प्रथम तीन विजेता समूहों को पुरस्कार प्रदान किए और छात्रों के प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर ‘लीगल फ्रेमवर्क: लावारिस बॉडीज’ विषय पर एक विशेष अतिथि व्याख्यान भी आयोजित किया गया। व्याख्यान में लावारिस शवों के प्रबंधन से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, मेडिकल शिक्षा में उनकी उपयोगिता तथा सार्वजनिक सेवा के दृष्टिकोण से नैतिक और विधिसम्मत निपटान जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

एनाटॉमी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मुकेश सिंगला के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रतियोगिता में डॉ. प्रतिमा गुप्ता, डॉ. बृजेंद्र सिंह, डॉ. मनु मल्होत्रा, डॉ. रजनीश अरोड़ा, डॉ. वेंकटेश पाई और डॉ. पंकज शर्मा ने निर्णायक मंडल की भूमिका निभाई।कार्यक्रम में संस्थान के उप निदेशक (प्रशासन) ले. कर्नल गोपाल मेहरा, डॉ. प्रशांत पाटिल, डॉ. बी.के. बस्तिया, डॉ. अनीसा मिर्जा सहित मुख्य आयोजक डॉ. रश्मि मल्होत्रा, डॉ. राजीव चौधरी और डॉ. राजू आर. बोकन के साथ-साथ डॉ. मृणाल बरुआ, डॉ. गीतांजलि खोरवाल और डॉ. कंचन बिष्ट सहित अनेक संकाय सदस्य एवं छात्र उपस्थित रहे।

इस रचनात्मक पहल ने यह साबित किया कि चिकित्सा शिक्षा में नवाचार और कला का समावेश छात्रों के लिए जटिल विषयों को समझने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

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