डोईवाला में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत सभा
डोईवाला: परवादून जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान के तहत डोईवाला क्षेत्र के बुल्लावाला में मनरेगा श्रमिकों और ग्रामीणों के साथ एक नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया। सभा में बड़ी संख्या में मनरेगा श्रमिकों, महिलाओं और स्थानीय ग्रामीणों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान मनरेगा श्रमिकों को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा भेजा गया पत्र वितरित किया गया। पत्र में केंद्र सरकार पर मनरेगा का नाम बदलने और योजना की मूल भावना को कमजोर करने के आरोप लगाते हुए चिंता व्यक्त की गई है। पत्र के माध्यम से श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान भी किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा के मूल स्वरूप को हर हाल में बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस योजना को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जिसका सीधा नुकसान गरीबों और मजदूरों को होगा। उन्होंने घोषणा की कि डोईवाला क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत स्तर पर चौपाल और जनसंपर्क कार्यक्रम चलाए जाएंगे ताकि लोगों को इस मुद्दे पर जागरूक किया जा सके।
डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव सिंह ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि गरीबों का अधिकार है। उनका कहना था कि यदि योजना के नाम और ढांचे में बदलाव किए जाते हैं तो इससे इसकी पहचान और संवैधानिक भावना प्रभावित होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से किसी भी तरह के बदलाव से पहले व्यापक चर्चा करने की मांग की।
क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रतिनिधि जावेद हुसैन ने अपने संबोधन में कहा कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों और मजदूरों के लिए जीवनरेखा के समान है, इसलिए इसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह योजना गांवों में रोजगार और आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है।सभा में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी मनरेगा को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमुख साधन बताते हुए इसे यथावत रखने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि योजना में किसी भी प्रकार का श्रमिक विरोधी बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सभा में परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल, डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य आशिया परवीन, जावेद हुसैन, बसारत अली, वसीम अहमद, अब्दुल हमीद, सहजाद अली, गुलशाना, नाजिया, साइमा, इलियास, सायरा, इसराना, फूलजहां, मकसूद अली, नवाबुद्दीन, अय्यूब हसन, जियाद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और मनरेगा श्रमिक मौजूद रहे।
