सांसद डॉ. नरेश बंसल ने जल शक्ति मंत्री से पूछे अहम सवाल
दिल्ली: राज्यसभा में जल प्रदूषण और जल संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा देखने को मिली। उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल द्वारा पूछे गए जल प्रदूषण से संबंधित प्रश्न के पूरक प्रश्नों के उत्तर में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने सदन को सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. नरेश बंसल ने अपने पूरक प्रश्न में यह जानना चाहा कि देश में जल संचयन की दिशा में अब तक क्या प्रगति हुई है, क्या केंद्र सरकार इस विषय पर किसी विशेष अभियान को आगे बढ़ाने का इरादा रखती है, साथ ही नदियों एवं जल स्रोतों में हो रहे प्रदूषण की प्रभावी रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा उन्होंने नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत अब तक हुए कार्य और शेष कार्यों की स्थिति पर भी जानकारी मांगी।
इस पर उत्तर देते हुए जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जल शक्ति अभियान के अंतर्गत देशभर में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण एवं जल संचयन के कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब तक 2 करोड़ से अधिक रिचार्ज स्ट्रक्चर बनाए जा चुके हैं। इसके साथ ही “जल संचयन – जन भागीदारी” अभियान के तहत लगभग 40 लाख से अधिक वाटर स्ट्रक्चर तैयार किए गए हैं, जो पूरी तरह से जन भागीदारी के माध्यम से संभव हो पाया है।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया “जल संचयन – जन भागीदारी” का नारा आज एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत लोगों ने स्वेच्छा से आगे बढ़कर अपने-अपने क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए कार्य किए। “कर्म क्षेत्र से मातृभूमि की ओर” जैसे आह्वान के माध्यम से बड़ी संख्या में लोग अपने गांवों और क्षेत्रों में लौटे और वहां पुराने जल स्रोतों एवं जल संरचनाओं के पुनर्जीवन (री-जुवेनेशन) के साथ-साथ नए जल संरचनाओं के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाई।
नदियों में बढ़ते प्रदूषण और विशेष रूप से गंगा नदी की स्वच्छता पर बात करते हुए मंत्री ने बताया कि नमामि गंगे मिशन के तहत अब तक गंगा की सफाई के लिए कुल 218 एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इन परियोजनाओं पर लगभग 35,698 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। इन योजनाओं के माध्यम से करीब 6,610 एमएलडी क्षमता के एसटीपी प्लांटों का निर्माण या पुनर्वास किया जा रहा है तथा 5,238 किलोमीटर लंबा सीवरेज नेटवर्क बिछाने का कार्य किया गया है।
मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि इनमें से अब तक 138 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता लगभग 3,977 एमएलडी है। साथ ही 4,571 किलोमीटर लंबा सीवरेज नेटवर्क भी पूरा किया जा चुका है। शेष परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है और सरकार का लक्ष्य है कि गंगा और अन्य नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए इन योजनाओं को तय समय सीमा में पूरा किया जाए ।
राज भूषण चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार जल संरक्षण, जल प्रदूषण नियंत्रण और नदियों की स्वच्छता को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार राज्यों और स्थानीय निकायों के सहयोग से जन भागीदारी को और मजबूत करते हुए आने वाले समय में जल संकट से निपटने के लिए ठोस कदम उठाती रहेगी।
सदन में दिए गए इस उत्तर से यह स्पष्ट हुआ कि जल संरक्षण और नदी स्वच्छता को लेकर केंद्र सरकार की योजनाएं न केवल कागजों तक सीमित हैं, बल्कि जन आंदोलन और जन भागीदारी के माध्यम से ज़मीनी स्तर पर भी प्रभावी ढंग से लागू की जा रही ।
