बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही गंगा आरती व्यवस्था पर नगर निगम सख्त
ऋषिकेश : ऋषिकेश के विश्वप्रसिद्ध त्रिवेणी घाट में वर्षों से गंगा आरती और घाट व्यवस्था संभाल रही श्री गंगा सभा पर अब नगर निगम ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। खाता-बही और वैधानिक पंजीकरण के बिना ही लंबे समय से घाट संचालन का जिम्मा निभा रही समिति को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में सामने आया है कि जनवरी 2021 के बाद संस्था का नवीनीकरण नहीं कराया गया, इसके बावजूद गंगा आरती जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक गतिविधियों का संचालन लगातार किया जा रहा था।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, बिना रजिस्ट्रेशन और बिना नियमित लेखा-जोखा के घाट प्रबंधन नियमों के विपरीत है। इसी को लेकर नगर निगम अब हरकत में आया है। निगम ने श्री गंगा सभा को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह एक सप्ताह के भीतर घाट समिति को उसके पुराने स्वरूप में पुनर्गठित करे और संबंधित दस्तावेजों पर नगर निगम के साथ हस्ताक्षर कराए।
नगर निगम का कहना है कि त्रिवेणी घाट केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में गंगा आरती जैसी धार्मिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और नियमों के तहत संचालित किया जाना आवश्यक है। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए संस्था को सभी जरूरी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
इस पूरे मामले को लेकर 3 जनवरी को नगर निगम बोर्ड की बैठक में भी चर्चा हुई थी। बैठक में प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट किया गया कि बिना पंजीकरण और बिना निगम की अनुमति के किसी भी संस्था को घाट प्रबंधन या धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि यदि तय समय सीमा के भीतर आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो नगर निगम आगे कड़ी कार्रवाई कर सकता है।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य किसी धार्मिक परंपरा को बाधित करना नहीं, बल्कि उसे नियमों के दायरे में लाकर पारदर्शिता और व्यवस्था सुनिश्चित करना है। वहीं, इस कार्रवाई के बाद अब सभी की निगाहें श्री गंगा सभा पर टिकी हैं कि वह निर्धारित समय में निगम के निर्देशों का पालन करती है या नहीं।
