एम्स ऋषिकेश में पदोन्नति विवाद गहराया, भूख हड़ताल पर डटे पांच नर्सिंग अधिकारी
आरक्षण रोस्टर लागू करने की मांग पर आंदोलन तेज, चार से छह किलो तक घटा वजन; लिखित आश्वासन मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं कर्मचारी
ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में नर्सिंग अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पदोन्नति प्रक्रिया में आरक्षण रोस्टर लागू नहीं किए जाने के आरोप के विरोध में एम्स एससी/एसटी कर्मचारी कल्याण संघ के पांच नर्सिंग अधिकारियों की भूख हड़ताल शनिवार को नौवें दिन भी जारी रही। लंबे समय से जारी अनशन का असर अब आंदोलनकारियों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का वजन चार से छह किलोग्राम तक कम हो चुका है। उनका ब्लड शुगर स्तर 60 से 70 के बीच दर्ज किया गया है, जबकि यूरिन में कीटोन की मात्रा भी मध्यम स्तर तक पहुंच गई है। चिकित्सकों की टीम लगातार आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है।
डीपीसी निरस्त कर दोबारा प्रक्रिया शुरू करने की मांग
विवाद की शुरुआत 10 अक्तूबर को हुई विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक के बाद हुई। इस बैठक में सीनियर नर्सिंग अधिकारियों (एसएनओ) को असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट (एएनएस) के पद पर पदोन्नति देने की प्रक्रिया पर विचार किया गया था। इसके बाद कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया कि पदोन्नति में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया गया।
संघ की मांग है कि विवादित डीपीसी को निरस्त किया जाए और निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाए। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांग पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक भूख हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी।
बिगड़ती सेहत के बीच आंदोलन जारी
भूख हड़ताल पर लोकेंद्र मीणा, दिनेश राठौर, युधिष्ठिर मीणा, दर्शन कुमार और चंद्रभान बैठे हैं। आंदोलन के नौ दिन पूरे होने के बाद भी कर्मचारियों के रुख में बदलाव नहीं आया है। उनका आरोप है कि प्रशासन उनकी मांगों का समाधान निकालने के बजाय धरना समाप्त करने का दबाव बना रहा है।
वहीं, एम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. श्रीलॉय मोहंती ने बताया कि आंदोलनरत कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। चिकित्सकों की टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है।
फिलहाल, पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उपजा विवाद सुलझ नहीं पाया है। एक ओर कर्मचारी आरक्षण रोस्टर के नियमानुसार पालन और लिखित आश्वासन पर अड़े हैं, तो दूसरी ओर उनकी लगातार गिरती सेहत के बीच आंदोलन के समाधान को लेकर स्थिति बनी हुई है।


