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देहरादून/ऋषिकेश : विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर आज उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। “हमारी पृथ्वी, हमारा भविष्य” थीम के तहत आयोजित इन कार्यक्रमों में स्कूली छात्र-छात्राओं, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवियों और प्रशासन ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। दिनभर चले इन आयोजनों में प्रकृति संरक्षण, स्वच्छता और सतत विकास का संदेश प्रमुख रूप से दिया गया।

देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार सहित विभिन्न शहरों और कस्बों में स्कूली बच्चों द्वारा जागरूकता रैलियां निकाली गईं। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए बच्चों ने “पेड़ लगाओ, पृथ्वी बचाओ”, “प्लास्टिक छोड़ो, प्रकृति जोड़ो” जैसे नारों के माध्यम से आमजन को पर्यावरण के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। कई विद्यालयों में निबंध, चित्रकला और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन कर बच्चों को पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास किया गया।

पर्यावरण विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठियों में बढ़ते प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित औद्योगिकीकरण, जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से पृथ्वी का पारिस्थितिक संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है। यदि समय रहते ठोस और सामूहिक प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में जल संकट, तापमान में वृद्धि और जैव विविधता के नुकसान जैसी गंभीर समस्याएं और विकराल रूप ले सकती हैं।

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति को अपने स्तर पर योगदान देना होगा। दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव, जैसे सिंगल-यूज प्लास्टिक से दूरी, पानी और बिजली की बचत, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग और नियमित रूप से पौधरोपण, बड़े बदलाव ला सकते हैं।

प्रशासन ने भी इस अवसर पर आमजन से अपील की कि वे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनें और स्वच्छता एवं हरित पहल में सक्रिय भागीदारी निभाएं। कई स्थानों पर लोगों ने पृथ्वी को सुरक्षित और स्वच्छ बनाए रखने का संकल्प भी लिया।

पृथ्वी दिवस के इस अवसर पर उत्तराखंड में जो उत्साह और जागरूकता देखने को मिली, वह इस बात का संकेत है कि लोग अब पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझने लगे हैं। जरूरत है कि यह जागरूकता केवल एक दिन तक सीमित न रहकर जन-आंदोलन का रूप ले, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पृथ्वी सुनिश्चित की जा सके।

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