ऋषिकेश में वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ जनआक्रोश, राजस्व ग्राम की मांग को लेकर जनसभा
ऋषिकेश : ऋषिकेश के बापूग्राम, बीसबीघा, मीरानगर और शिवाजीनगर सहित कई क्षेत्रों में वन विभाग की हालिया कार्रवाई के विरोध में जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित विशाल जनसभा में स्थानीय नागरिकों ने केंद्र और प्रदेश सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि वर्षों से बसे इन आबादी वाले क्षेत्रों को तत्काल राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जाए, ताकि यहां रहने वाले हजारों परिवारों का अस्तित्व सुरक्षित रह सके।
जनसभा में वक्ताओं ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में शामिल इन इलाकों को अब भी वन भूमि बताकर कार्रवाई किया जाना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि इस गंभीर मुद्दे पर उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए और नगर निगम क्षेत्र की वन भूमि समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। वक्ताओं का कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद ऋषिकेश क्षेत्र के हजारों परिवारों पर बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है, जबकि यह वही जनता है जो बीते 50–60 वर्षों से यहां निवास कर रही है।
सभा में यह भी कहा गया कि इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय-समय पर सरकारों ने स्वयं बिजली, पानी, सड़क, सीवर और नगर निगम जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। ऐसे में अब उन्हें अतिक्रमणकारी बताकर हटाना मानवीय दृष्टि से भी गलत है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब सरकारें दशकों तक इन बस्तियों को मान्यता देती रहीं, तो अब अचानक इन्हें उजाड़ने की कार्रवाई क्यों की जा रही है।संघर्ष समिति के संयोजक रमेश जुगलान ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि केवल आश्वासन अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विधानसभा के विशेष सत्र में सरकार को सदन के पटल पर ठोस प्रस्ताव पारित करना होगा। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाए, ताकि आबादी वाले इन क्षेत्रों को वन संरक्षण अधिनियम के दायरे से बाहर कर राजस्व ग्राम घोषित किया जा सके।

रमेश जुगलान ने यह भी मांग रखी कि जब तक यह पूरी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़, विस्थापन और भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पर पूर्ण विराम लगाने की गारंटी विधानसभा में दी जाए। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश के हजारों बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं आज अपनी छत बचाने के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।
जनसभा के दौरान अविनाश सेमल्टी, अनिल रावत, हर्षवर्धन रावत, सत्य कपरवाण, बीरेंद्र रमोला सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में आंदोलन को तेज करने की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो संघर्ष को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
इस पूरे मामले पर वन क्षेत्राधिकारी गंभीर सिंह धमांदा ने बताया कि विभाग द्वारा केवल कागजी कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें नगर निगम और तहसील प्रशासन के अधिकारी भी शामिल रहेंगे। बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
