उत्तराखंड में ‘राह-वीर योजना’ साबित हो रही प्रभावी
देहरादून : उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित ‘राह-वीर योजना’ (पूर्व में ‘गुड सेमेरिटन योजना’) अब प्रभावी साबित होती नजर आ रही है। इस योजना के तहत दुर्घटना के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने या उनकी मदद करने वाले आम नागरिकों को प्रोत्साहन राशि और सम्मान प्रदान किया जाता है।राज्य सरकार की इस पहल का मकसद सड़क हादसों में ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान पीड़ितों को तत्काल चिकित्सा सहायता दिलाना है, जिससे उनकी जान बचाई जा सके। पहले अक्सर लोग कानूनी झंझट या पुलिस कार्रवाई के डर से दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने से हिचकते थे, लेकिन ‘राह-वीर योजना’ ने इस मानसिकता में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।
योजना के अंतर्गत मददगार व्यक्ति को न केवल आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाता है, बल्कि उसकी पहचान भी गोपनीय रखी जाती है, ताकि उसे किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा, ऐसे लोगों को सम्मानित कर समाज में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास भी किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग और परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, योजना लागू होने के बाद कई मामलों में घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे उनकी जान बचाने में सफलता मिली है। अधिकारियों का कहना है कि इस योजना के चलते आम नागरिक अब अधिक जिम्मेदारी के साथ आगे आ रहे हैं और दुर्घटना पीड़ितों की मदद कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि सड़क हादसे के दौरान घायल व्यक्ति की मदद करने से न हिचकें, क्योंकि आपकी छोटी सी पहल किसी की जिंदगी बचा सकती है। ‘राह-वीर योजना’ न केवल मानवता की मिसाल पेश कर रही है, बल्कि सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
