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देहरादून : उत्तराखण्ड में अभिभावकों को राहत देने वाले एक महत्वपूर्ण फैसले में अब स्कूल बस और वैन के लिए अधिकतम परिवहन शुल्क तय कर दिया गया है। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में राज्य परिवहन प्राधिकरण ने यह निर्णय लिया, जिससे मनमानी फीस वसूली पर रोक लगेगी।राज्य परिवहन प्राधिकरण, उत्तराखण्ड की बैठक परिवहन आयुक्त एवं प्राधिकरण के अध्यक्ष बृजेश कुमार संत की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में अधिशासी अभियन्ता लोक निर्माण विभाग चन्द्रशेखर जोशी, अपर सचिव एवं अपर विधि परामर्शी सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।

दरअसल, नैनीताल उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका संख्या-161/2024 में 22 सितंबर 2025 को आदेश पारित करते हुए स्कूलों में चलने वाले ठेका वाहनों जैसे स्कूल बस, टैक्सी और मैक्सी के परिवहन शुल्क का निर्धारण करने के निर्देश दिए थे। इसके अनुपालन में संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया।

समिति ने शुल्क निर्धारण के लिए विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन किया। इसमें वाहन की औसत कीमत, मासिक किश्त, चालक और परिचालक/महिला गार्ड का वेतन, मोटरयान कर, अनुरक्षण (मेंटेनेंस), बीमा, ईंधन, परमिट, फिटनेस और अन्य खर्चों को शामिल किया गया। सभी घटकों का विश्लेषण करने के बाद समिति ने अपनी संस्तुति प्राधिकरण को सौंपी। प्राधिकरण द्वारा सम्यक विचार के बाद तय किया गया कि अब 5 किलोमीटर तक की दूरी के लिए अधिकतम 2100 रुपये और 10 किलोमीटर तक के लिए 2200 रुपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। इसके अलावा अन्य दूरी के लिए भी अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं।

इस फैसले से राज्यभर के हजारों अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही स्कूल प्रबंधन द्वारा परिवहन शुल्क में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।

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