ऋषिकेश बाईपास परियोजना नरेंद्रनगर विधानसभा से गुज़रेगी, यातायात जाम से मिलेगी राहत

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देहरादून/ऋषिकेश: ऋषिकेश नगर और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही यातायात समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में राज्य सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। ऋषिकेश बाईपास परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 07 ,पूर्व में NH-58 पर प्रस्तावित तीनपानी, योगनगरी, खारास्रोत बाईपास मार्ग को लेकर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को देहरादून में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की।

बैठक में परियोजना की प्रगति, प्रस्तावित मार्गरेखा, तकनीकी पहलुओं और पर्यावरणीय प्रभावों पर गहन चर्चा की गई। मंत्री सुबोध उनियाल ने विशेष रूप से हर्बल पार्क और मुनि की रेती क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को आवश्यक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के दौरान पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय जनभावनाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।

मंत्री के निर्देश पर बाईपास मार्ग के डिज़ाइन में आवश्यक संशोधन पर सहमति बनी, ताकि परियोजना से पर्यावरण को न्यूनतम क्षति पहुंचे और स्थानीय लोगों की चिंताओं का समाधान हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाईपास निर्माण इस तरह किया जाएगा, जिससे प्राकृतिक संसाधनों, हरित क्षेत्रों और धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री सुबोध उनियाल ने जानकारी दी कि यह महत्वाकांक्षी बाईपास परियोजना जनपद टिहरी गढ़वाल के नरेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र से होकर गुज़रेगी। परियोजना के पूर्ण होने के बाद ऋषिकेश नगर में भारी वाहनों और बाहरी यातायात का दबाव कम होगा, जिससे स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को जाम की समस्या से राहत मिलेगी। साथ ही, यह मार्ग चारधाम यात्रा और अन्य पर्यटन गतिविधियों के लिए भी अधिक सुगम और सुरक्षित साबित होगा।

मंत्री ने कहा कि बाईपास परियोजना से न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलेगी। व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। अंत में मंत्री सुबोध उनियाल ने दोहराया कि राज्य सरकार विकास, जनसुविधा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर कार्य करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जनहित में सभी परियोजनाओं को पारदर्शिता, संवेदनशीलता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि विकास टिकाऊ और सर्वसमावेशी हो सके।

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