सीएम धामी के निर्देश पर देहरादून में स्कूल भवनों की विशेष जांच
देहरादून: देहरादून जिले में वर्षों से जर्जर स्कूल भवनों में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त और ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने जिले के सभी जर्जर शासकीय विद्यालय भवनों की व्यापक जांच के आदेश दिए। इसके तहत महज 10 दिनों के भीतर 100 स्कूलों की विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई, जिससे शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आ गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुल 100 स्कूलों में से 79 स्कूल भवन पूरी तरह से निष्प्रोज्य पाए गए हैं। इनमें 13 माध्यमिक विद्यालय और 66 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। ये भवन इतने जर्जर हालात में हैं कि इनमें बच्चों का बैठकर पढ़ना गंभीर खतरे से खाली नहीं है। इसके अलावा 17 विद्यालय ऐसे पाए गए, जिनकी स्थिति आंशिक रूप से जर्जर है और जहां मरम्मत या पुनर्निर्माण की तत्काल आवश्यकता बताई गई है।
रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 63 स्कूलों में वैकल्पिक शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित कर दी है। इन विद्यालयों के छात्रों को नजदीकी सुरक्षित भवनों, अन्य स्कूल परिसरों या अस्थायी कक्षाओं में शिफ्ट किया गया है, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो और किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे। शेष 16 विद्यालयों में भी जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था पूरी किए जाने का भरोसा प्रशासन ने दिया है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जर्जर घोषित किए गए स्कूल भवनों के ध्वस्तीकरण के लिए शासन स्तर से 1 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत कर दी गई है, जिससे जल्द ही असुरक्षित भवनों को गिराकर नए और सुरक्षित स्कूल भवनों के निर्माण का रास्ता साफ हो सकेगा।
प्रशासन का कहना है कि आगे भी जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों की नियमित निगरानी की जाएगी, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। यह कदम न केवल बच्चों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि अभिभावकों की लंबे समय से चली आ रही चिंता को भी काफी हद तक दूर करेगा।
