मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक सम्पन्न

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देहरादून : मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) एवं राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के अंतर्गत प्राप्त प्रस्तावों के अनुमोदन हेतु राज्य कार्यकारिणी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए करोड़ों रुपये की धनराशि को स्वीकृति प्रदान की गई। यह निर्णय राज्य में आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बैठक के दौरान राज्य आपदा मोचन निधि के तैयारी एवं क्षमता निर्माण मद के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई। पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस दूरसंचार द्वारा उत्तराखण्ड पुलिस संचार नेटवर्क के उन्नयन हेतु ₹15.34 करोड़ की स्वीकृति दी गई, जिससे आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी संचार व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी।मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) द्वारा वन प्रभागों को आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने हेतु ₹11 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, अपर प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव सुरक्षा एवं आसूचना) को मानव-वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण के लिए ₹15 करोड़ की मंजूरी दी गई, जिससे प्रभावित लोगों को समय पर राहत पहुंचाई जा सके।

राजस्व परिषद की ओर से दैवीय आपदाओं में क्षतिग्रस्त पटवारी चौकियों के पुनर्निर्माण हेतु कुल ₹14.95 करोड़ स्वीकृत किए गए। इसमें 30 से 70 प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त 225 चौकियां तथा 70 प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त 37 चौकियों का पुनर्निर्माण शामिल है। लोक निर्माण विभाग को प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण के लिए ₹25 करोड़ की स्वीकृति दी गई, जबकि उत्तराखण्ड ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण को मानसून के दौरान बादल फटने एवं अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त मार्गों को खोलने एवं मरम्मत हेतु ₹25 करोड़ की मंजूरी प्रदान की गई।

डा. रघुनन्दन सिंह टोलिया उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी, नैनीताल स्थित आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की गतिविधियों के लिए ₹44.50 लाख की स्वीकृति दी गई। साथ ही, अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, टिहरी गढ़वाल, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल एवं पिथौरागढ़ के जिलाधिकारियों को एसडीआरएफ के अंतर्गत कुल ₹92.50 करोड़ की कार्येतर स्वीकृति प्रदान की गई।

सिंचाई विभाग के प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए कई बाढ़ सुरक्षा कार्यों को स्वीकृति दी गई। जनपद चमोली के गैरसैंण में रामगंगा नदी पर भू-कटाव रोकने हेतु ₹6.83 करोड़, उत्तरकाशी के हर्षिल में भागीरथी नदी तट पर सुरक्षात्मक कार्यों हेतु ₹10.24 करोड़ तथा हरिद्वार के खानपुर क्षेत्र में क्षतिग्रस्त सेतुओं एवं मोटर मार्गों के एप्रोच कार्यों हेतु ₹6.77 करोड़ की स्वीकृति दी गई।चंपावत की पूर्णागिरी तहसील में हुड्डी नदी से ग्राम छानीगोठ की सुरक्षा हेतु ₹5.97 करोड़, हरिद्वार के बहादराबाद स्थित सिडकुल क्षेत्र में बरसाती नाले के सुरक्षात्मक कार्य हेतु ₹2.78 करोड़ तथा गंगा नगरी कॉलोनी में बाढ़ सुरक्षा दीवार निर्माण हेतु ₹50.14 लाख की मंजूरी प्रदान की गई।

इसके अतिरिक्त उत्तरकाशी के नौगांव में बनाल गाड के दोनों ओर बाढ़ सुरक्षा कार्य हेतु ₹1.7 करोड़, सहसपुर के दयानगर एवं जामुनवाला में बाढ़ सुरक्षा हेतु ₹4.81 करोड़, रायपुर क्षेत्र में विभिन्न नदियों में क्षतिग्रस्त पुस्तों के पुनर्निर्माण हेतु ₹4.87 करोड़ तथा रिस्पना नदी में बाढ़ सुरक्षा योजना हेतु ₹91 लाख स्वीकृत किए गए।रायपुर क्षेत्र में नालापानी राव, नागल राव, आमवाला राव, रिस्पना, दुल्हनी एवं सौंग नदी में सुरक्षा दीवारों के निर्माण हेतु ₹4.14 करोड़ तथा रिस्पना नदी पर रेलवे पुल के डाउनस्ट्रीम में बाढ़ सुरक्षा कार्य हेतु ₹2.63 करोड़ की मंजूरी दी गई। धर्मपुर क्षेत्र में सुस्वा नदी तट पर बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए ₹4.30 करोड़ स्वीकृत किए गए।

इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग को एसडीआरएफ मद के अंतर्गत बेलखेत में क्वैराला नदी पर 85 मीटर स्पान के पैदल झूला पुल निर्माण हेतु ₹4.82 करोड़ की धनराशि का अनुमोदन प्रदान किया गया।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि स्वीकृत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध एवं गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए, ताकि आपदा की स्थिति में जनहानि एवं संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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