डोईवाला में संयुक्त किसान मोर्चा का प्रतिरोध दिवस, तहसील मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन
डोईवाला: संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर केंद्र सरकार की कथित किसान विरोधी नीतियों के विरोध में आज डोईवाला में प्रतिरोध दिवस मनाया गया। इस दौरान संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसानों ने डोईवाला तहसील मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए उप जिलाधिकारी महोदया के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन प्रेषित किया। प्रतिरोध दिवस के तहत आज सुबह करीब 11 बजे संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान डोईवाला गन्ना समिति के किसान भवन में एकत्रित हुए। यहां से किसानों ने नारेबाजी करते हुए तहसील मुख्यालय तक मार्च निकाला और केंद्र सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश प्रकट किया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा डोईवाला के संयोजक ताजेंद्र सिंह उर्फ ताज ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करने वाली सरकार लगातार ऐसे कानून ला रही है, जो किसानों को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीज कानून 2025 और बिजली कानून 2025 जैसे कानून किसानों के लिए विनाशकारी साबित होंगे। इसके साथ ही स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश C2+50% के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी अब तक लागू न करना यह दर्शाता है कि सरकार केवल पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है। उन्होंने इन दोनों कानूनों को तत्काल वापस लेने की मांग की।
उत्तराखंड किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष गंगाधर नौटियाल ने कहा कि केंद्र सरकार मनमाने तरीके से किसानों को कमजोर कर रही है और झूठे वादों से उन्हें गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज देशभर में किसान प्रतिरोध दिवस मना रहे हैं, जो किसानों में बढ़ती नाराजगी का स्पष्ट संकेत है।उन्होंने किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी की मांग करते हुए कहा कि साल में तीन–चार बार ₹2000 देने जैसी योजनाएं किसानों के लिए किसी भी तरह से लाभकारी नहीं हैं। यदि सरकार किसानों का पूरा कर्ज माफ कर दे, तो ऐसी योजनाओं की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
किसान सभा के जिला अध्यक्ष दलजीत सिंह और गन्ना समिति के पूर्व अध्यक्ष मनोज नौटियाल ने उधम सिंह नगर जनपद के निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भू-माफियाओं और कुछ पुलिस अधिकारियों के उत्पीड़न के चलते सुखवंत सिंह को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने राज्य सरकार से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी भू-माफियाओं व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।

सीआईटीयू के जिला अध्यक्ष कृष्ण गुनियाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने मजदूरों और कर्मचारियों पर चार श्रम संहिताएं थोपकर उनके अधिकारों पर कुठाराघात किया है। उन्होंने मांग की कि इन चारों संहिताओं को वापस लेते हुए पहले से मौजूद 29 श्रम कानूनों को बहाल किया जाए।उन्होंने मनरेगा को मजबूत करने, मजदूर विरोधी कानूनों को निरस्त करने और मजदूरों की न्यूनतम आय 26,000 रुपये प्रतिमाह तय करने की मांग भी उठाई।
किसान यूनियन चढूनी के प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह और जिला अध्यक्ष गुरदीप सिंह ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की, तो किसान व्यापक जन आंदोलन और बड़े प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।
प्रदर्शन को डोईवाला किसान सभा के मंडल अध्यक्ष बलवीर सिंह, जाहिद अंजुम, कृषक फेडरेशन के अध्यक्ष उमेद बोरा, फुरकान अहमद कुरैशी और एडवोकेट साकिर हुसैन ने भी संबोधित किया। प्रदर्शन का संचालन किसान सभा डोईवाला मंडल सचिव याकूब अली ने किया। इस दौरान सरजीत सिंह, गुरपाल सिंह, प्रेम सिंह पाल, भविन्द्र सिंह, पूरन सिंह, ज्ञान सिंह, सरदार गुरचरण सिंह, सिंगाराम, सुहाना अहमद, अवतार सिंह, थॉमस मेसी, न्यूटन आइंस्टिन सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, डोईवाला में आयोजित यह प्रतिरोध दिवस केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ किसानों के बढ़ते असंतोष और आंदोलन की दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता नजर आया।
