स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने शिक्षकों को जल सेवा और पशु-पक्षियों की रक्षा के लिए किया प्रेरित
ऋषिकेश : भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने मानवता, सेवा और संवेदनशीलता का प्रेरणादायी संदेश देते हुए जल सेवा को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने परमार्थ निकेतन द्वारा संचालित सभी विद्यालयों के शिक्षकों को प्रेरित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जल सेवा अभियान चलाकर जरूरतमंद लोगों, पशु-पक्षियों और राहगीरों को राहत पहुंचाने का कार्य करें।
स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान समय में केवल स्वयं को गर्मी से सुरक्षित रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग और प्रत्येक जीव के प्रति करुणा का भाव रखना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के कारण तीर्थ यात्री, मजदूर, गरीब, राहगीर, वृद्धजन और छोटे बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे समय में यदि किसी प्यासे को एक गिलास पानी भी उपलब्ध कराया जाए, तो वह केवल पानी नहीं बल्कि मानवता का अमृत है।

उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अपने घरों, विद्यालयों, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों के बाहर मिट्टी के मटकों में स्वच्छ एवं शीतल जल की व्यवस्था करें, ताकि राह चलते लोग अपनी प्यास बुझा सकें। स्वामी जी ने कहा कि “नर सेवा ही नारायण सेवा” भारतीय संस्कृति की मूल भावना है और जल सेवा उसी परंपरा का जीवंत उदाहरण है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने पशु-पक्षियों की पीड़ा पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रचंड गर्मी के कारण अनेक पक्षी पानी के अभाव में तड़पते हैं और कई बार उनकी मृत्यु तक हो जाती है। उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि वे अपने घरों, बालकनी, छतों, दुकानों और कार्यालयों के बाहर पानी से भरे छोटे पात्र रखें, जिससे पक्षियों और अन्य जीवों को राहत मिल सके।

उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे इस संदेश को विद्यार्थियों और समाज तक भी पहुंचाएं, ताकि नई पीढ़ी में सेवा, करुणा, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के संस्कार विकसित हो सकें। स्वामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव प्रकृति के साथ सामंजस्य और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देती रही है तथा जल को जीवन का आधार माना गया है।
उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया जल संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब जल सेवा केवल पुण्य का कार्य नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी बन गई है। उन्होंने लोगों से गर्मी के दिनों में सावधानी बरतने, अधिक पानी पीने, अनावश्यक धूप से बचने और जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आने की अपील की।
इस अवसर पर शिक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जल सेवा अभियान चलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी से आह्वान किया गया कि इस भीषण गर्मी में सेवा, संवेदना और करुणा का दीप जलाकर मानवता को जीवित रखने का संकल्प लें।
