उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता ने एक वर्ष पूरा किया, सामाजिक सुधार और सुशासन में मील का पत्थर साबित

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देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को लागू हुए एक वर्ष पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू यह संहिता राज्य में सामाजिक सुधार और सुशासन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यूसीसी की सेवाएँ अब भारतीय संविधान की 22 भाषाओं में उपलब्ध हैं, जिससे राज्य के सभी नागरिकों को इसका लाभ समान रूप से मिल सके। पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने के लिए एआई-आधारित सहायता का उपयोग किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, नागरिक आसानी से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं और प्रक्रिया के प्रत्येक चरण पर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

उत्तराखंड सरकार ने यह भी बताया कि एक वर्ष में यूसीसी के तहत किसी भी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं हुई, जो इसकी सफलता और जनता में विश्वास को दर्शाता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित करना है और यह कानून सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में यूसीसी की सफलता अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण पेश कर सकती है। डिजिटल और एआई तकनीक के सहयोग से इस कानून को जनता के लिए सरल और सुलभ बनाया गया है, जो सुशासन की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सरकार ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में यूसीसी सेवाओं को और अधिक विकसित किया जाएगा और नागरिकों की सुविधा के लिए निरंतर सुधार जारी रहेगा।

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