निहंगों की उत्तराखंड में एंट्री से बढ़ी सतर्कता, DM-SSP ने खुद संभाली सुरक्षा व्यवस्था
देहरादून: कर्णप्रयाग में हुए विवाद का असर अब राजधानी देहरादून तक पहुंच गया है। हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब से निकले निहंगों के एक जत्थे के उत्तराखंड में प्रवेश करने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन हाई अलर्ट पर आ गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देर रात तक वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मैदान में डटे रहे और शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
जानकारी के अनुसार, पांवटा साहिब में प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद निहंगों का जत्था कुल्हाल की ओर बढ़ा। पुलिस ने सीमा पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन जत्था कथित तौर पर वैकल्पिक मार्गों से उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर गया। इसके बाद देहरादून पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी।
प्रेमनगर चौक, शिमला बाईपास, आईएसबीटी समेत शहर के प्रमुख मार्गों पर नाकेबंदी कर वाहनों की सघन जांच की गई। पीएसी और कई थानों की अतिरिक्त पुलिस फोर्स को भी तैनात किया गया। रातभर पुलिस को आशंका रही कि अन्य निहंग जत्थे भी उत्तराखंड की ओर बढ़ सकते हैं। सुरक्षा जांच के चलते कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लगीं और लोगों को ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।
इस घटनाक्रम के बाद पुलिस की शुरुआती रणनीति और खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। सीमा पर निगरानी के बावजूद जत्थे के वैकल्पिक मार्ग से आगे निकल जाने के बाद प्रशासन को शहर के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करनी पड़ी। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस पूरी तरह तैयार है।
वहीं, निहंग प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का संघर्ष या कानून-व्यवस्था बिगाड़ना नहीं है। उनका कहना है कि कर्णप्रयाग की घटना में दोनों पक्षों की गलती रही और मामले का समाधान आपसी सहमति से होना चाहिए। उन्होंने कर्णप्रयाग प्रकरण में गिरफ्तार चार निहंगों की रिहाई की मांग दोहराते हुए कहा कि जब तक उनके साथियों की रिहाई नहीं होती, वे वापस नहीं लौटेंगे।
गौरतलब है कि 16 जून को हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान कर्णप्रयाग में पार्किंग को लेकर चार निहंगों और एक स्थानीय होटल संचालक के बीच विवाद हो गया था। आरोप है कि विवाद के दौरान तलवारबाजी हुई, जिसमें कई स्थानीय लोग घायल हो गए। घटना के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग करीब तीन घंटे तक जाम रहा। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर तीन निहंगों को गिरफ्तार किया था। बाद में रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में भी निहंगों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसका 23 जून को पुलिस-प्रशासन और सिख प्रतिनिधियों के बीच वार्ता के बाद शांतिपूर्ण समाधान निकाल लिया गया।
