हाथी हमलों के बीच ग्रामीणों की चिंता बढ़ी
उत्तराखंड : उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद स्थित लालढांग रेंज में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित 1402 मीटर लंबी हाथी सुरक्षा दीवार का निर्माण भूमि विवाद के चलते ठप पड़ गया है। यह दीवार विशेष रूप से हाथियों की आवाजाही को नियंत्रित करने और आसपास के गांवों व कृषि भूमि को नुकसान से बचाने के लिए बनाई जानी थी।
मामला उस समय जटिल हो गया जब वन विभाग और राजस्व विभाग के अभिलेखों में संबंधित भूमि को लेकर स्पष्ट अंतर सामने आया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देश के बावजूद दोनों विभाग अब तक जमीन की सटीक स्थिति और स्वामित्व तय नहीं कर पाए हैं। स्थिति को और पेचीदा बनाते हुए 1960 से पहले के राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे भूमि का इतिहास और मालिकाना हक प्रमाणित करना मुश्किल हो गया है। इस अनिश्चितता के कारण परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका है, जबकि स्थानीय स्तर पर हाथियों के हमलों और फसलों को नुकसान की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में ग्रामीणों में चिंता और नाराजगी भी बढ़ रही है।
विवाद के समाधान में हो रही देरी को देखते हुए वन विभाग ने अब वैकल्पिक उपायों पर विचार शुरू कर दिया है। विभाग ने हाथियों की घुसपैठ रोकने के लिए हाथी रोधक खाई और सोलर फेंसिंग जैसी योजनाएं प्रस्तावित की हैं, जिन्हें अपेक्षाकृत कम समय में लागू किया जा सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए भूमि विवाद का जल्द निपटारा जरूरी है, ताकि दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
