शहीद की शहादत पर पूरे जनपद में शोक की लहर, गर्व के साथ दी गई अंतिम विदाई

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बागेश्वर: बागेश्वर की शांत घाटियां आज “हवलदार गजेन्द्र सिंह गढ़िया अमर रहें” के नारों से गूंज उठीं। जैसे ही शहीद हवलदार गजेन्द्र सिंह गढ़िया का पार्थिव शरीर उनके पैतृक क्षेत्र पहुंचा, पूरा इलाका शोक और गर्व के भाव से भर गया। तिरंगे में लिपटा वीर सपूत जब अंतिम दर्शन के लिए लाया गया, तो लोगों की आंखें नम हो गईं और माहौल गमगीन हो उठा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, लेकिन उनके चेहरे पर अपने लाल की शहादत का गर्व भी साफ झलक रहा था।

जम्मू–कश्मीर के किश्तवाड़ा जिले के सिंहपोरा क्षेत्र में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान मातृभूमि की रक्षा करते हुए हवलदार गजेन्द्र सिंह गढ़िया ने सर्वोच्च बलिदान दिया। जैसे ही यह खबर बागेश्वर जिले में पहुंची, पूरा जनपद शोक में डूब गया। शहीद के सम्मान में गांव से लेकर शहर तक लोगों ने तिरंगा थामकर उन्हें अंतिम विदाई दी। बागेश्वर जिले में सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और बिगुल की गूंज के बीच तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान भारत माता की जय और अमर शहीद गजेन्द्र सिंह गढ़िया के नारों से वातावरण देशभक्ति से सराबोर हो गया।

अंतिम संस्कार में कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया ने पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा,“मातृभूमि की रक्षा करते हुए जम्मू–कश्मीर के किश्तवाड़ा ज़िले के सिंहपोरा क्षेत्र में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए हवलदार गजेन्द्र सिंह गढ़िया जी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। समस्त क्षेत्रवासियों ने नम आंखों से अमर शहीद को श्रद्धांजलि दी है। आपका बलिदान केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का गर्व है। आपकी शहादत हमारी नसों में देशभक्ति बनकर बहती रहेगी। भारत मां का यह वीर सपूत सदैव अमर रहेगा। देश सेवा में दिए गए आपके सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्र सदैव कृतज्ञता और गर्व के साथ स्मरण रखेगा। ॥ ॐ शांति शांति शांति ॥

इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पूर्व सैनिक, सामाजिक संगठन और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। हर आंख नम थी, लेकिन हर दिल में अपने वीर सपूत पर गर्व भी था। शहीद गजेन्द्र सिंह गढ़िया की शहादत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देवभूमि के सपूत देश की रक्षा के लिए हर बलिदान देने को सदैव तत्पर रहते हैं। आज बागेश्वर ने अपने वीर को अंतिम विदाई तो दी, लेकिन उनकी वीरगाथा और बलिदान सदैव लोगों के दिलों में अमर रहेंगे।

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