केदारनाथ से बदरीनाथ तक कर्मचारियों का आंदोलन खत्म, 15 दिन में मांगें सुलझाने का बीकेटीसी ने दिया भरोसा

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रुद्रप्रयाग। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अस्थायी कर्मचारियों ने आखिरकार अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। गुरुवार को केदारनाथ धाम समेत समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में चल रहा धरना-प्रदर्शन वार्ता के बाद खत्म हो गया। वहीं, कर्मचारियों ने प्रस्तावित आमरण अनशन का फैसला भी वापस ले लिया है। समिति प्रबंधन ने उनकी विभिन्न मांगों पर 15 दिनों के भीतर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी सहित समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से दूरभाष पर बातचीत की। वार्ता में उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, विजय कप्रवाण और मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ भी शामिल रहे। प्रबंधन की ओर से मांगों के समाधान का आश्वासन मिलने के बाद केदारनाथ में आंदोलन कर रहे कर्मचारियों ने धरना समाप्त करने पर सहमति जता दी।

गौरतलब है कि इससे पहले 27 अक्टूबर को हुई बातचीत के बाद बदरीनाथ धाम और ज्योतिर्मठ कार्यालय में तैनात अस्थायी कर्मचारी भी अपना आंदोलन वापस ले चुके थे। अब केदारनाथ में धरना खत्म होने के साथ ही समिति के विभिन्न स्थानों पर चल रहा विरोध प्रदर्शन पूरी तरह समाप्त हो गया है।

वेतनवृद्धि से लेकर बीमा और ईपीएफ तक पर होगा विचार

कर्मचारियों की मांगों के समाधान के लिए बीकेटीसी ने उपसमिति का गठन किया है। इसकी जिम्मेदारी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती और विजय कप्रवाण को सौंपी गई है। उपसमिति कर्मचारियों की वेतनवृद्धि, आकस्मिक मृत्यु और सेवानिवृत्ति की स्थिति में एकमुश्त आर्थिक सहायता, दुर्घटना बीमा तथा ईपीएफ से जुड़े मामलों पर विचार करेगी। समिति को 15 दिनों के भीतर इन मांगों के निस्तारण की दिशा में काम करने को कहा गया है।

आंदोलन करने वाले कर्मचारियों पर नहीं होगी कार्रवाई

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर अस्थायी कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए वन टाइम सेटलमेंट की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन में शामिल होने वाले किसी भी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई या उत्पीड़नात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।

समिति प्रबंधन के इस आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब सभी की निगाहें अगले 15 दिनों में होने वाली कार्रवाई और लंबित मांगों के समाधान पर टिकी हैं।

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