एम्स ऋषिकेश में भर्ती मरीजों को सिखाया जा रहा योग, समग्र स्वास्थ्य पर जोर
AIIMS Rishikesh के आयुष इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग ने अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए बेडसाइड योग चिकित्सा शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य निवारक और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना तथा पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों को एकीकृत करना है।
विभाग द्वारा आईपीडी वार्डों में मरीजों को योग, प्राणायाम और तनाव प्रबंधन से जुड़े अभ्यास कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही देखभालकर्ताओं और अस्पताल स्टाफ के लिए भी वेलनेस प्रोग्राम संचालित किए जा रहे हैं, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार हो सके।
आयुष विभाग की प्रमुख डॉ. मोनिका पठानिया ने बताया कि यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण को मजबूत करती है, जहां आयुष पद्धतियां आधुनिक चिकित्सा का पूरक बनकर कार्य कर रही हैं।
संस्थान में Ministry of AYUSH द्वारा विकसित 10 मिनट का ‘वाई-ब्रेक’ प्रोटोकॉल भी लागू किया गया है, जिससे हेल्थकेयर वर्कर्स का तनाव कम करने और कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
विभिन्न वार्डों में मरीजों की जरूरत के अनुसार विशेष योग मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। पिडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी वार्ड में तनाव कम करने के लिए श्वसन अभ्यास, जेरियाट्रिक वार्ड में लचीलापन बढ़ाने वाले योग और यूरोलॉजी वार्ड में सर्जरी से पहले व बाद में रिकवरी हेतु योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, लाइफस्टाइल क्लीनिक, बाल अस्थमा क्लीनिक और प्रोफेशनल बर्नआउट वेलबीइंग क्लीनिक के माध्यम से मरीजों, डॉक्टरों और स्टाफ को नियमित योग सत्रों से जोड़ा जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि योग अब केवल व्यायाम नहीं बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है, जो शरीर और मन के संतुलन के साथ समग्र स्वास्थ्य को सुदृढ़ करता है।
