हरिद्वार अर्धकुंभ 2027: तैयारियों के लिए प्रयागराज पहुंचेगा अधिकारियों का दल

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प्रयागराज/हरिद्वार : उत्तराखंड के हरिद्वार में वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीर प्रयास शुरू हो गए हैं। इसी क्रम में हरिद्वार के अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को प्रयागराज पहुंचेगा। दो दिवसीय प्रवास के दौरान यह टीम महाकुंभ और माघ मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विकसित की गई व्यवस्थाओं का स्थलीय अध्ययन करेगी।

प्रतिनिधिमंडल प्रयागराज मेला क्षेत्र में लागू यातायात प्रबंधन प्रणाली, श्रद्धालु सुविधाएं, एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम और क्राउड मैनेजमेंट डैशबोर्ड की कार्यप्रणाली को नजदीक से समझेगा। विशेष रूप से प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की रणनीतियों का गहन विश्लेषण किया जाएगा।प्रतिनिधिमंडल के सदस्य आकाश जोशी ने बताया कि अध्ययन के दौरान मेला क्षेत्र में सुगम यातायात व्यवस्था, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, रिंग मेन यूनिट (RMU) सिस्टम, विद्युत पोलों पर लगाए गए क्यूआर कोड, जियो ट्यूब के माध्यम से किए गए कटाव निरोधक कार्यों, ओपन एसटीपी के स्थान पर प्री-फैब एसटीपी, टेंट सिटी मॉडल, वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों और ऑनलाइन एप आधारित फ्लोटिंग रेस्टोरेंट जैसी नवाचारपूर्ण व्यवस्थाओं की जानकारी ली जाएगी।

इसके अतिरिक्त बाइक टैक्सी संचालन, मेला सेवा ऐप, जन सुविधाओं में किए गए तकनीकी नवाचार, ट्रैफिक मूवमेंट प्लान के अंतर्गत बनाए गए अस्थायी होल्डिंग एरिया, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली और स्नान घाटों की व्यवस्थाओं का भी विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।माघ मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि हरिद्वार की टीम माघ मेले की सफल व्यवस्थाओं को समझने प्रयागराज आ रही है। दो दिनों तक टीम घाटों, यातायात व्यवस्था और क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम का निरीक्षण करेगी, ताकि इन्हीं अनुभवों के आधार पर हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 की योजना को और बेहतर बनाया जा सके।

वहीं, वर्ष 2026 में महाराष्ट्र में प्रस्तावित कुंभ मेले की तैयारियों के तहत महाराष्ट्र सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का प्रतिनिधिमंडल भी हाल ही में प्रयागराज का दौरा कर चुका है। इस दल में डिप्टी सेक्रेटरी समृद्धि, डिप्टी डायरेक्टर न्यूज वर्षा आधेय, असिस्टेंट डायरेक्टर काशी बाई और अधीक्षक संतोष वागडरे शामिल थे।महाराष्ट्र की टीम ने महाकुंभ और माघ मेले के दौरान अपनाई गई मीडिया कवरेज रणनीति, मीडिया प्रबंधन, लाइव प्रसारण व्यवस्था और सुरक्षा समन्वय प्रणाली का स्थलीय निरीक्षण किया। प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान बनाए गए मीडिया प्वाइंट्स, प्रेस सुविधाओं और प्रशासन-मीडिया समन्वय की कार्यप्रणाली का अध्ययन कर टीम अपने राज्य लौट गई।

प्रयागराज के संगम तट पर माघ मेले के दौरान पुण्य स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। एक सप्ताह तक अपेक्षाकृत कम रही भीड़ के बाद रविवार को स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में फिर से उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। संगम के साथ-साथ हनुमान मंदिर में भी दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालु लंबी कतारों में नजर आए।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार अब तक 22 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में पुण्य की डुबकी लगा चुके हैं। यदि यही रुझान बना रहा तो 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व तक माघ मेला एक नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है।

महाकुंभ की दिव्य आभा के बाद सनातन परंपरा में माघ मेले में संगम स्नान का महत्व और अधिक बढ़ गया है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में स्नान को मोक्षदायी माना गया है। यही कारण है कि प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं। लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यदि यही क्रम जारी रहा, तो इस वर्ष का माघ मेला ऐतिहासिक उपलब्धि तक पहुंच सकता है। माघ मेले का अंतिम प्रमुख स्नान पर्व 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर होगा, जिस पर प्रशासन की विशेष नजर बनी हुई है।

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