ऋषिकेश में वैदिक ब्राह्मण महासभा का वार्षिक सम्मेलन सम्पन्न
ऋषिकेश : वैदिक ब्राह्मण महासभा ऋषिकेश का वार्षिक सम्मेलन श्री जनार्दन आश्रम, दंडीवाड़ा में विधिवत रूप से सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सैकड़ों ब्राह्मणों ने सहभागिता करते हुए वैदिक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ ज्योतिषपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी श्री माधवाश्रम महाराज के समाधि स्थल सभागार में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कथावाचक एवं ज्योतिष पीठ के व्यास, पूर्व राज्यमंत्री आचार्य शिव प्रसाद ममगाँई रहे, जबकि अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य एवं महामहिम राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. ओमप्रकाश भट्ट ने की। इस दौरान पूर्व राज्यमंत्री आचार्य सुभाष जोशी, वेदाचार्य मायाराम रतूड़ी, काशी से पधारे दंडी स्वामी अनिरुद्धानंद तीर्थ तथा केशव स्वरूप ब्रह्मचारी सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
सम्मेलन में वैदिक ब्राह्मण महासभा के पदाधिकारियों द्वारा सभी अतिथियों एवं वैदिक विद्वानों को उत्तरीय और पुष्पमालाएं पहनाकर सम्मानित किया गया। महासभा के महामंत्री आचार्य शिव स्वरूप सेमवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए संगठन की गतिविधियों और समाज में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विद्वानों को भी सम्मानित किया गया। व्याकरण के क्षेत्र में पूर्व प्राचार्य महेंद्र नारायण शुक्ल, ज्योतिष में पूर्व प्राचार्य जयकृष्ण सेमवाल तथा वेद के क्षेत्र में योगदान के लिए शिव कुमार मालवीय सहित संस्कृत महाविद्यालयों एवं विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि आचार्य शिव प्रसाद ममगाँई ने अपने संबोधन में महासभा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में वैदिक सनातन परंपराओं का संरक्षण एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा कि त्योहारों और व्रतों को लेकर समाज में फैल रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. ओमप्रकाश भट्ट ने कहा कि ब्राह्मण समाज का दर्पण होता है। यदि हमारा आचार-विचार और जीवनशैली शुद्ध होगी, तो समाज भी उससे प्रेरणा लेगा। उन्होंने संस्कारों और पूजा पद्धति के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्हें जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि आचार्य सुभाष जोशी, आचार्य मायाराम रतूड़ी, केशव स्वरूप ब्रह्मचारी, दंडी स्वामी अनिरुद्धानंद तीर्थ, आचार्य महेंद्र नारायण शुक्ल सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन आचार्य सुभाष चंद्र डोभाल द्वारा किया गया।
इस अवसर पर वैदिक ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष आचार्य जगमोहन मिश्रा, महामंत्री आचार्य शिव प्रसाद सेमवाल, सुरेश पंत, पूर्व महापौर अनिता ममगाँई, जयेन्द्र रमोला, लक्ष्मण सिंह चौहान, डॉ. ओमप्रकाश पूर्वाल, डॉ. जनार्दन कैरवान, डॉ. गिरीश पाण्डेय, के.पी. उनियाल, अभिषेक शर्मा, रमाबल्लभ भट्ट, पार्षद रीना शर्मा, माधुरी गुप्ता, एल.पी. पुरोहित, संदीप शास्त्री, पूर्व अध्यक्ष गंगाराम व्यास, मणिराम पैन्यूली, महेश चमोली, जितेंद्र भट्ट, राजेंद्र पाण्डेय, मुकेश थपलियाल, हरेंद्र भट्ट, आयुष कोठारी, सूरज विजल्वान, जगदीश जोशी, हर्षमणि नौटियाल, मनोज चमोली सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
