2027 की तैयारी में सीएम धामी आक्रामक, हिंदुत्व और देवभूमि एजेंडे पर फोकस
देहरादून : उत्तराखंड की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समय से पहले ही आक्रामक रणनीति अपनाते हुए स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि भाजपा इस बार केवल सत्ता विरोधी लहर से बचाव नहीं, बल्कि ‘प्रो इनकंबेंसी’ यानी सरकार के पक्ष में माहौल बनाकर मैदान में उतरेगी। इसके केंद्र में मुख्यमंत्री धामी की बदली हुई राजनीतिक शैली और हिंदुत्व तथा देवभूमि के आध्यात्मिक-सांस्कृतिक स्वरूप पर उनका मुखर रुख है।
मुख्यमंत्री धामी ने हाल के महीनों में अपने बयानों और फैसलों के जरिए यह साफ किया है कि वे उत्तराखंड की पहचान को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं हैं। देवभूमि की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक संरचना को अक्षुण्ण बनाए रखना उनकी राजनीति का प्रमुख आधार बनता जा रहा है। यही कारण है कि समान नागरिक संहिता , लैंड जिहाद, लव जिहाद, अवैध अतिक्रमण और जनसांख्यिकीय संतुलन जैसे मुद्दों पर सरकार का रुख पहले से कहीं अधिक सख्त और स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समान नागरिक संहिता को लेकर लिया गया निर्णय मुख्यमंत्री धामी का “मास्टर स्ट्रोक” साबित हुआ था। इस कदम ने न केवल भाजपा के कोर वोट बैंक को मजबूती दी, बल्कि कांग्रेस को भी बैकफुट पर धकेल दिया। उसी रणनीति की सफलता से उत्साहित होकर धामी अब अपनी पहले की सौम्य और संतुलित छवि से बाहर निकलते नजर आ रहे हैं और अधिक मुखर, निर्णायक तथा वैचारिक रूप से स्पष्ट नेतृत्व के तौर पर खुद को स्थापित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री धामी का यह बदला हुआ तेवर पार्टी संगठन के भीतर भी संदेश दे रहा है कि 2027 का चुनाव केवल सरकार की उपलब्धियों के भरोसे नहीं, बल्कि वैचारिक स्पष्टता और सांस्कृतिक एजेंडे के साथ लड़ा जाएगा। भाजपा नेतृत्व यह मानकर चल रहा है कि उत्तराखंड जैसे राज्य में हिंदुत्व और देवभूमि की अवधारणा भावनात्मक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी प्रभावी मुद्दे हैं।
सरकार की उपलब्धियों को भी इसी रणनीति के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। बुनियादी ढांचे का विकास, चारधाम ऑल वेदर रोड, केदारनाथ-बदरीनाथ पुनर्निर्माण, रोजगार योजनाएं, निवेश बढ़ाने के प्रयास और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने जैसे मुद्दों को हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नैरेटिव से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि मजबूत सांस्कृतिक पहचान के साथ विकास भी समान रूप से संभव है।
कांग्रेस के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर भाजपा सरकार आक्रामक राजनीतिक एजेंडे के साथ मैदान में उतर रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अब तक स्पष्ट वैकल्पिक रणनीति और मजबूत नेतृत्व का चेहरा सामने नहीं ला पाई है। मुख्यमंत्री धामी का लगातार सक्रिय और निर्णायक नेतृत्व कांग्रेस के लिए दबाव बढ़ा रहा है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी तरह चुनावी मोड में दिखाई दे रहे हैं। हिंदुत्व, देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और विकास के एजेंडे के साथ उनकी आक्रामक रणनीति भाजपा की ‘प्रो इनकंबेंसी’ योजना का अहम हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि धामी का यह बदला हुआ राजनीतिक रुख विपक्ष के लिए कितनी मुश्किलें खड़ी करता है और उत्तराखंड की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।
