केंद्रीय बजट से उत्तराखंड को उम्मीद से बढ़कर मदद की आस: सीएम धामी

खबर शेयर करें -

देहरादून: केंद्रीय बजट को लेकर पूरे देश की तरह उत्तराखंड में भी उम्मीदों का माहौल है। विभिन्न वर्गों की निगाहें आगामी बजट पर टिकी हैं और प्रदेश सरकार से लेकर किसान तक अपने-अपने हितों से जुड़े बड़े फैसलों की आस लगाए बैठे हैं।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार के इस बार के बजट में उत्तराखंड को उम्मीद से बढ़कर सहयोग मिलेगा। सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, आपदा प्रबंधन, पर्यटन, कृषि और स्वरोजगार को बढ़ावा देने से जुड़े कई प्रस्ताव केंद्र को भेजे हैं और उन्हें सकारात्मक निर्णय की आशा है।

सीएम ने विशेष रूप से सीमांत और पर्वतीय जनपदों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता, सड़क और कनेक्टिविटी परियोजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और युवाओं के लिए रोजगारोन्मुख योजनाओं पर जोर दिए जाने की उम्मीद जताई। उनका कहना है कि डबल इंजन सरकार का लाभ उत्तराखंड को लगातार मिल रहा है और आने वाला बजट इस रफ्तार को और तेज करेगा।

इधर प्रदेश के किसान भी केंद्रीय बजट से बड़ी राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं। किसानों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मांग फसलों की शत-प्रतिशत खरीद की कानूनी गारंटी है। उनका तर्क है कि वे परंपरागत अनाज फसलों के साथ-साथ नकदी फसलें भी उगाते हैं, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर पूरी उपज की खरीद की कोई सुनिश्चित व्यवस्था नहीं होने से उन्हें बाज़ार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर रहना पड़ता है।

किसानों ने मांग की है कि सरकार तय मूल्य पर उनकी पूरी फसल खरीदने की गारंटी दे ताकि उन्हें लागत का उचित लाभ मिल सके। साथ ही बागवानी, मसाले, दालें और अन्य नकदी फसलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज की भी अपेक्षा जताई गई है। पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों की एक बड़ी समस्या जंगली जानवरों द्वारा फसलों को पहुंचाया जाने वाला नुकसान भी है। किसानों का कहना है कि बंदर, सूअर और अन्य वन्यजीव बड़ी मात्रा में फसलें बर्बाद कर देते हैं, जिससे मेहनत और निवेश दोनों पर पानी फिर जाता है। उन्होंने बजट में फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस और दीर्घकालिक उपाय, जैसे प्रभावी फेंसिंग, मुआवजा व्यवस्था को सरल और त्वरित बनाना तथा सामुदायिक सुरक्षा योजनाओं के लिए विशेष प्रावधान की मांग उठाई है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बजट में पर्वतीय कृषि के लिए अलग रणनीति, प्रसंस्करण और भंडारण सुविधाओं का विस्तार, कोल्ड चेन और बेहतर बाजार व्यवस्था पर निवेश बढ़ाया जाता है तो उत्तराखंड के किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि संभव है।

कुल मिलाकर प्रदेश सरकार को जहां विकास परियोजनाओं के लिए बड़े वित्तीय सहयोग की उम्मीद है, वहीं किसान अपनी उपज के उचित मूल्य, सुरक्षित खेती और नकदी फसलों के लिए प्रोत्साहन की आस लगाए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय बजट में उत्तराखंड को क्या और कितना खास मिलता है।

Ad