समान नागरिक संहिता पर सीएम धामी का बड़ा बयान, सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जागरण फोरम में प्रदेश से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की देवभूमि की सांस्कृतिक, सामाजिक और जनसांख्यिकीय पहचान से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का प्रत्येक निर्णय राज्य के भविष्य, युवाओं के हित और देवभूमि के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने की दिशा में है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करना केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि UCC से महिलाओं को समान अधिकार मिलेंगे और समाज में कानून का एक समान स्वरूप स्थापित होगा।मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि “देवभूमि में अब किसी भी वर्ग के साथ अलग-अलग कानून नहीं चलेंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने 27 हजार से अधिक सरकारी नौकरियों को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत युवाओं को प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि पहले जहां भर्ती प्रक्रियाओं पर सवाल उठते थे, वहीं अब परीक्षा प्रणाली को नकलमुक्त और निष्पक्ष बनाया गया है। उन्होंने कहा, उत्तराखंड का युवा अब योग्यता के आधार पर आगे बढ़ रहा है, यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में कानून से ऊपर कोई नहीं है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शुरू से ही निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की और आगे भी न्यायिक प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।

मुख्यमंत्री धामी ने मदरसा बोर्ड को भंग करने के फैसले को शिक्षा में समानता और पारदर्शिता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि राज्य में बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, यही सरकार का लक्ष्य है।उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह की अलगाववादी सोच को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में लैंड जिहाद और लव जिहाद जैसी गतिविधियों पर सरकार पूरी तरह सख्त है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य की भूमि, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कोशिश को कानून के दायरे में सख्ती से रोका जाएगा।मुख्यमंत्री ने कहा, “देवभूमि की पवित्रता और पहचान हमारी प्राथमिकता है।”

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और परंपरा की भूमि है। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार देवभूमि के देवत्व को सुरक्षित रखने के लिए हरसंभव कदम उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि आने वाला समय उत्तराखंड के लिए विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण का समय होगा।मुख्यमंत्री के इस स्पष्ट और बेबाक वक्तव्य को राज्य के भविष्य को लेकर उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।

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