परमार्थ निकेतन में आध्यात्मिक विभूतियों का संगम
ऋषिकेश : ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गरिमा और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और सुप्रसिद्ध कथावाचिका जया किशोरी ने अपनी पावन उपस्थिति से इस तपोभूमि को अलंकृत किया।माँ गंगा के पावन तट पर आयोजित विश्वप्रसिद्ध परमार्थ गंगा आरती में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती और डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में इन दोनों विभूतियों की उपस्थिति श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावविभोर और अविस्मरणीय अनुभव रही। इस गरिमामयी अवसर पर पूज्य स्वामी और साध्वी ने श्री श्री रविशंकर एवं जया किशोरी को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
अपने उद्बोधन में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से ओतप्रोत है। उन्होंने कहा कि जब महान संत और आध्यात्मिक विभूतियाँ एक मंच पर एकत्रित होती हैं, तो वह वैश्विक चेतना को जागृत करने का माध्यम बनता है। आज के दौर में, जब मानवता अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है, अध्यात्म ही वह सेतु है जो व्यक्ति को स्वयं, समाज और परमात्मा से जोड़ता है।
डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा कि परमार्थ गंगा तट पर संतों का संगम केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभूति है, जो मन को शांति, स्थिरता और भक्ति का स्पर्श प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर हमें यह स्मरण कराते हैं कि जीवन केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिसका उद्देश्य आत्मिक उन्नति और विश्व कल्याण है।पूज्य श्री श्री रविशंकर ने कहा कि परमार्थ गंगा आरती सनातन संस्कृति के मूल्यों—प्रेम, सेवा, करुणा और एकता—का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ें, प्रकृति संरक्षण को अपनाएं और सेवा के मार्ग पर चलते हुए विश्व को बेहतर बनाने में योगदान दें। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के माध्यम से विश्वभर में भारतीय संस्कृति के प्रसार की सराहना भी की।
वहीं, जया किशोरी ने कहा कि परमार्थ निकेतन और गंगा तट उनके लिए आध्यात्मिक घर जैसा है। यहां आकर पूज्य स्वामी और साध्वी के सान्निध्य में उन्हें विशेष आत्मिक शांति और भावनात्मक जुड़ाव का अनुभव होता है। कार्यक्रम के अंत में परमार्थ गंगा आरती में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस दिव्य संगम का साक्षी बनकर अपने जीवन को धन्य अनुभव किया। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बना, बल्कि मानवता, सेवा और एकता का संदेश भी देता रहा।
