लुसुन बने मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष
देहरादून : उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति में एक बार फिर नई हलचल देखने को मिल रही है। जल, जंगल और जमीन की लड़ाई के लिए पहचाने जाने वाले उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) में युवा नेतृत्व की एंट्री से संगठन में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। इसी क्रम में युवा नेता लुसुन के उक्रांद में शामिल होने और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने से पार्टी में एक नई धार दिखाई दे रही है। उक्रांद लंबे समय से राज्य के मूल मुद्दों—मूल निवास, भू-कानून और संसाधनों पर स्थानीय अधिकार—को लेकर संघर्ष करता रहा है। ऐसे में लुसुन जैसे युवा चेहरे के जुड़ने को आगामी विधानसभा चुनाव के दृष्टिकोण से भी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि युवा नेतृत्व के सक्रिय होने से पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल सकती है और आम जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा। प्रदेश की जनता भी इस बदलाव को लेकर उम्मीद लगाए बैठी है कि उक्रांद एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरेगा।
इस बीच, उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने लुसुन को मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ का केंद्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। जिम्मेदारी मिलने के बाद लुसुन ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए इसे केवल एक पद नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता और मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प बताया।
आज उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती जी द्वारा मुझे मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ का केंद्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। मैं केंद्रीय अध्यक्ष एवं समस्त शीर्ष नेतृत्व का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मैं संगठन के सभी वरिष्ठ नेताओं का विशेष धन्यवाद करता हूँ, जिन्होंने मुझे पर विश्वास जताते हुए यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा। यह सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, संस्कृति और हमारे मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प है।
आप सभी साथियों, कार्यकर्ताओं और प्रदेशवासियों से आग्रह है कि इस अभियान में अपना सहयोग और समर्थन दें, ताकि हम मिलकर उत्तराखंड के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बना सकें।जय उत्तराखंड।”उक्रांद में इस नई नियुक्ति को संगठन के विस्तार और मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव में यह युवा नेतृत्व पार्टी को कितना लाभ दिला पाता है और प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बना पाता है।
