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ऋषिकेश : ऋषिकेश के मुनि की रेती स्थित गंगा रिज़ॉर्ट में चल रहे अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के अंतर्गत प्रातः एक विशेष योग एवं ध्यान सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में दून योगपीठ, देहरादून के संस्थापक योगाचार्य डॉ. बिपिन जोशी ने “Way of Life” (जीवन की राह) विषय पर उपस्थित देश-विदेश से आए योग साधकों को संबोधित किया।अपने विचार रखते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक रूप से कमाना तो सीख गया है, लेकिन सही मायनों में जीवन जीने की कला को भूलता जा रहा है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व अवसाद और तनाव से जूझ रहा है, जिसका मुख्य कारण बढ़ता उपभोक्तावाद और बाजारवाद है। ऐसे समय में प्राचीन ऋषि-मुनियों की परंपरा से प्राप्त योग का ज्ञान और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।

योगाचार्य डॉ. जोशी ने योग साधकों को ध्यान (मेडिटेशन) का अभ्यास भी कराया और मानसिक शांति एवं संतुलन के महत्व पर प्रकाश डाला। सत्र के अंत में विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई तथा यूक्रेन, रूस, ईरान, इज़राइल और लेबनान सहित विभिन्न देशों में युद्ध के कारण अकाल मृत्यु को प्राप्त लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर महायोगी जीतानंद, प्रोफेसर ज्योति उपाध्याय चुफाल, ओम योगी सहित अन्य योग विशेषज्ञों का विशेष सहयोग रहा।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. बिपिन जोशी ने आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्री श्री रविशंकर से भी भेंट की। इस दौरान उन्होंने योग, प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद और अध्यात्म के माध्यम से देवभूमि उत्तराखंड को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख वेलनेस हब के रूप में विकसित करने को लेकर विस्तृत चर्चा की।अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में प्रतिदिन विभिन्न योग सत्र, ध्यान, आध्यात्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से विश्वभर से आए साधकों को भारतीय योग परंपरा से जोड़ा जा रहा है।

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