मैक्लोडगंज को ‘दलाई लामा तीर्थ स्थल’ घोषित करने की मांग

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हिमाचल प्रदेश / मैक्लोडगंज : नोबेल शांति पुरस्कार विजेता एवं बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित मैक्लोडगंज को ‘दलाई लामा तीर्थ स्थल’ घोषित किए जाने की मांग उठाई है। उन्होंने यह बात 14वें दलाई लामा के स्वर्ण सिंहासन आरोहण की 86वीं वर्षगांठ के अवसर पर चुगलाखंग मठ में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान कही।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु, तिब्बती समुदाय के सदस्य, आध्यात्मिक गुरु, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न देशों से आए अनुयायी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठान, प्रार्थना सभाएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की गईं, जिनमें शांति, करुणा और मानवता के संदेश को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।अपने संबोधन में कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि दलाई लामा न केवल तिब्बती समुदाय के आध्यात्मिक गुरु हैं, बल्कि वे विश्व शांति, करुणा और अहिंसा के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि मैक्लोडगंज वर्षों से दलाई लामा का निवास स्थान रहा है और यह स्थान वैश्विक स्तर पर शांति एवं आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बन चुका है। ऐसे में इसे औपचारिक रूप से ‘दलाई लामा तीर्थ स्थल’ का दर्जा दिया जाना चाहिए, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और भी सुदृढ़ हो सके।

सत्यार्थी ने दलाई लामा से भेंट कर उनका आशीर्वाद भी प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि दलाई लामा का जीवन और उनका संदेश पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे करुणा, सहिष्णुता और मानवाधिकारों के मूल्यों को अपनाते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लें।कार्यक्रम के दौरान दलाई लामा के दीर्घायु और विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गईं। तिब्बती समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी दलाई लामा के नेतृत्व और उनके योगदान को स्मरण करते हुए भावपूर्ण वक्तव्य दिए।

मैक्लोडगंज, जिसे ‘लिटिल ल्हासा’ के नाम से भी जाना जाता है, लंबे समय से तिब्बती आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। कैलाश सत्यार्थी की इस मांग के बाद क्षेत्र को विशेष तीर्थ स्थल का दर्जा देने को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

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