चंद्रेश्वर नाले का डीएम निरीक्षण, गंगा में गंदा पानी रोकने के निर्देश

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ऋषिकेश/देहरादून: ऋषिकेश स्थित चंद्रेश्वर नाले से बिना उपचारित गंदे पानी और ठोस कचरे के गंगा नदी में प्रवाहित होने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने नाले का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को नाले के समुचित उपचार के लिए विस्तृत रिपोर्ट और कार्ययोजना शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। निरीक्षण में अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग और महाप्रबंधक, निर्माण वृत्त (गंगा), उत्तराखंड पेयजल निगम ने नाले का संपूर्ण नक्शा और प्रस्तावित एक्शन प्लान से जिलाधिकारी को अवगत कराया।

जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी स्थिति में दूषित जल गंगा नदी में प्रवाहित न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा में मिलने वाले सभी नालों का जल स्वच्छ और उपचारित होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि चाहे वह सात विभागों का वरिष्ठतम प्रतिष्ठान हो या आवासीय भवन, यदि गंदा पानी सीधे गंगा में जाएगा, तो कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने नाले में वेस्ट वाटर प्रवाहित करने वाले 25 घरों के पाइप-ड्रेन्स को तत्काल सीज करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस समस्या को गंभीर मानते हुए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता वृद्धि के लिए शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने के भी निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि गंगा की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी जाएगी, जिससे प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

जिलाधिकारी ने नगर निगम के मुख्य नगर आयुक्त, उपजिलाधिकारी, सीवरेज अनुरक्षण इकाई, पेयजल निगम, जल संस्थान और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आपसी समन्वय से इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद इसे आम जनता के साथ भी साझा किया जाएगा।सीवरेज अनुरक्षण इकाई के अधिकारियों ने बताया कि ऋषिकेश में 7.50 एमएलडी क्षमता वाला सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (STP) नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत निर्मित किया गया है। सीमित भूमि के कारण यह एसटीपी बहुमंजिला स्वरूप में बनाया गया, जो देश का अपनी तरह का पहला STP है। यह एसटीपी अक्टूबर 2020 से अनुरक्षणाधीन है।

एसटीपी तीन नालों के शोधन के लिए बनाया गया है, जिनमें श्मशान घाट नाला और चंद्रेश्वर नगर नाला प्रमुख हैं। ढालवाला नाले में सीवेज के साथ-साथ प्राकृतिक जल का प्रवाह भी अधिक होता है। वर्षा ऋतु में ढालवाला नाले का प्रवाह STP की क्षमता से अधिक हो जाता है, ऐसे में श्मशान घाट और चंद्रेश्वर नाले का संपूर्ण सीवेज STP में उपचारित किया जाता है, जबकि ढालवाला नाले का जल क्षमता की सीमा तक ही लिया जाता है।

मानसून और उसके बाद लगभग चार माह तक ढालवाला नाले में भूमिगत जल की मात्रा अधिक रहने के कारण जल की गुणवत्ता परीक्षण में प्रदूषण की मात्रा न्यून पाई जाती है। ढालवाला नाले के दोनों ओर ड्रोन सर्वे और परिवारों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। प्रारंभिक रूप से 502 परिवार चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 38 परिवारों का सीवर सीधे नाले में और 84 परिवारों का ग्रे-वाटर नाले में प्रवाहित हो रहा है। सर्वेक्षण की प्रक्रिया जारी है और सभी आंकड़ों का सत्यापन किया जा रहा है। सीधे प्रवाहित हो रहे जल के नमूनों की जांच NABL प्रमाणित प्रयोगशाला से कराई जा रही है।

निरीक्षण के दौरान उप-जिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहरा, नगर आयुक्त राम कुमार बिनवाल, सीओ पुलिस पूर्णिमा गर्ग, और अनुरक्षण इकाई, जल निगम, जल संस्थान, सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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