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देहरादून : मुख्य कार्यकारी अधिकारी/जिलाधिकारी सविन बंसल के दिशा-निर्देशन में देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा दून इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर (डीआईसीसी) “सदैव दून” के अंतर्गत विकसित सॉफ्टवेयर मॉड्यूल्स और स्मार्ट समाधानों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को परेड ग्राउंड स्थित दून लाइब्रेरी सभागार में एक जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्मार्ट सिटी देहरादून, तीर्थपाल सिंह ने की। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यशाला के दौरान बताया गया कि डीआईसीसी “सदैव दून” स्मार्ट सिटी की प्रमुख और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य केवल तकनीकी अवसंरचना स्थापित करना नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी बनाना है। कोविड-19 महामारी के दौरान से लेकर वर्तमान तक यह कमांड एवं कंट्रोल सेंटर बहुउपयोगी सिद्ध हुआ है। इसके माध्यम से न केवल आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की गई, बल्कि अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और जनसेवाओं की निगरानी में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ई-गवर्नेंस, जीआईएस (भू-स्थानिक सूचना प्रणाली), डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (डीएमएस), सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सहित विभिन्न सॉफ्टवेयर मॉड्यूल्स के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनके अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करना था। परियोजना के तहत अत्याधुनिक डेटा सेंटर, इंटेलीजेंट ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम, सीसीटीवी नेटवर्क, वेरिएबल मैसेज डिस्प्ले, पर्यावरण सेंसर, इमरजेंसी कॉल बॉक्स और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम जैसे कई स्मार्ट समाधान विकसित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त “दून-1” सिटीजन ग्रीवेंस एप्लिकेशन और स्मार्ट सिटी वेब पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने और सेवाओं की जानकारी प्राप्त करने की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।

गौरतलब है कि 15 मार्च 2022 से यह परियोजना लाइव है और वर्तमान में सिटी पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, आरटीओ, जीएसटी तथा एसडीसी सहित विभिन्न विभागों द्वारा इसका नियमित उपयोग किया जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम लाभ नागरिकों और प्रशासन दोनों तक पहुंचाना रहा।प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को जीआईएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से भू-स्थानिक डेटा के प्रबंधन और विश्लेषण की प्रक्रिया समझाई। साथ ही ई-गवर्नेंस प्रणाली के जरिए सेवाओं के डिजिटलीकरण, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी गई। डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से दस्तावेजों के सुरक्षित, सुव्यवस्थित और डिजिटल संधारण की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को सॉफ्टवेयर लॉगिन प्रक्रिया, डेटा एंट्री, रिपोर्ट जनरेशन और विभागीय समन्वय से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं का प्रशिक्षण दिया गया।

अपने संबोधन में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी तीर्थपाल सिंह ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत विकसित डिजिटल प्रणालियों का मूल उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और दक्ष बनाना है। उन्होंने सभी विभागों से अपेक्षा की कि वे इन सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म्स का नियमित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करें, ताकि शासन-प्रशासन की सेवाएं नागरिकों तक त्वरित, सुगम और पारदर्शी तरीके से पहुंच सकें।

कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया गया तथा भविष्य में ऐसे नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि डिजिटल प्रणालियों का उपयोग और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाया जा सके। देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड का यह प्रयास शहर को तकनीकी रूप से सशक्त, सुरक्षित और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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