स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल बना कूड़ा शुल्क संग्रहण अभियान
देहरादून : राजधानी देहरादून में स्वच्छता प्रबंधन के क्षेत्र में एक अभिनव पहल ने सफलता की नई कहानी लिख दी है। नगर निगम देहरादून द्वारा राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) के अंतर्गत पंजीकृत महिला स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से संचालित घर-घर कूड़ा संग्रहण शुल्क अभियान ने न केवल शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत किया है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है।
नगर निगम ने शहर के कुल 100 वार्डों में से 57 वार्डों में कूड़ा शुल्क संग्रहण की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपी है। इन समूहों की महिलाएं त्रैमासिक आधार पर, यानी प्रत्येक तीन माह में घर-घर जाकर निर्धारित उपयोगकर्ता शुल्क का संग्रहण कर रही हैं। अभियान के शुरुआती चरण में ही इसकी सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। जुलाई, अगस्त और सितंबर माह के दौरान 63 लाख रुपये से अधिक की राजस्व प्राप्ति दर्ज की गई है, जो इस मॉडल की सफलता को दर्शाती है।इस पहल की सबसे खास बात यह है कि कुल प्राप्त मुनाफे का 25 प्रतिशत हिस्सा सीधे संबंधित महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रदान किया जा रहा है। इससे समूह से जुड़ी महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिला है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। कई महिलाओं के लिए यह पहली बार है जब उन्हें स्थायी आमदनी का अवसर मिला है। इससे उनके आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी में भी वृद्धि हुई है।
महिला समूहों की भूमिका केवल शुल्क संग्रहण तक सीमित नहीं है। वे घर-घर जाकर नागरिकों से सफाई व्यवस्था को लेकर फीडबैक भी ले रही हैं। इससे नगर निगम को जमीनी स्तर पर समस्याओं की जानकारी मिल रही है और समाधान की दिशा में त्वरित कार्रवाई संभव हो पा रही है। इस समन्वित और सहभागी मॉडल से शहर की स्वच्छता व्यवस्था में स्पष्ट सुधार देखा जा रहा है।
वार्ड संख्या 64, नेहरूग्राम की समूह सदस्य सीमा बिष्ट ने इस योजना के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और नगर निगम प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस पहल से उनके जैसी अनेक महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार मिला है। इससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहयोग कर पा रही हैं।नगर निगम आयुक्त नमामि बंसल ने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों को कूड़ा उठान शुल्क संग्रहण का दायित्व सौंपा गया है। समूह निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रभावी ढंग से शुल्क संग्रहण कर निगम को जमा कर रहे हैं, जिससे राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता भी आई है।
सहायक नगर आयुक्त राजवीर सिंह चौहान ने जानकारी दी कि त्रैमासिक प्रणाली के अंतर्गत तीन माह का शुल्क एकमुश्त लिया जा रहा है। अब तक 63 लाख रुपये की प्राप्ति हो चुकी है, जिसमें से 25 प्रतिशत राशि महिला समूहों को प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि भविष्य में इस मॉडल को अन्य वार्डों में भी विस्तार देने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
स्वच्छता, पारदर्शिता और महिला सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ने वाला यह अभिनव मॉडल देहरादून के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा है। यह पहल न केवल शहर को अधिक स्वच्छ और सुव्यवस्थित बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार भी प्रदान कर रही है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य शहरों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है।
