उत्तराखंड में यूसीसी के बाद विवाह पंजीकरण में ऐतिहासिक बदलाव, ऑनलाइन प्रणाली से बढ़ी रफ्तार
देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में बड़ा और ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। यूसीसी लागू होने से पहले राज्य में विवाहों का पंजीकरण ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत किया जाता था। उस समय पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी, जिसके कारण पति-पत्नी को दो गवाहों के साथ तय तिथि पर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित होना पड़ता था। न केवल यह प्रक्रिया समय लेने वाली थी, बल्कि इसके लिए कोई निश्चित समय सीमा भी तय नहीं थी।
लेकिन समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण प्रणाली पूरी तरह डिजिटल और सरल हो गई है। वर्तमान में यूसीसी के तहत लगभग शत-प्रतिशत विवाह पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से किए जा रहे हैं। इस नई व्यवस्था के तहत दंपत्ति और गवाह कहीं से भी अपने दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं और वीडियो बयान दर्ज कराते हुए विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि आम नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी राहत मिली है।
इस ऑनलाइन प्रणाली का असर आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है। यूसीसी लागू होने के बाद एक वर्ष से भी कम समय में, सोमवार 19 जनवरी 2026 की दोपहर तक राज्य में कुल 4,74,447 विवाह पंजीकरण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। इस प्रकार प्रतिदिन औसतन लगभग 1400 विवाह पंजीकरण हो रहे हैं। तुलना करें तो पुराने अधिनियम के तहत प्रतिदिन औसत विवाह पंजीकरण की संख्या केवल 67 के आसपास थी।
केवल विवाह पंजीकरण ही नहीं, बल्कि अन्य पारिवारिक व्यवस्थाओं से जुड़े प्रमाणपत्र भी अब ऑनलाइन माध्यम से जारी किए जा रहे हैं। यूसीसी लागू होने के बाद अब तक 316 लोगों ने विवाह डाइवोर्स का प्रमाणपत्र ऑनलाइन प्राप्त किया है। वहीं 68 लोगों ने लिव-इन रिलेशनशिप में प्रवेश करने और 2 लोगों ने लिव-इन रिलेशनशिप समाप्त करने का प्रमाणपत्र भी ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए हासिल किया है।
यूसीसी के तहत आवेदन करने के बाद विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अधिकतम 15 दिन की समय सीमा तय की गई है। हालांकि व्यवहार में देखा जा रहा है कि अधिकांश मामलों में आवेदकों को औसतन पांच दिन के भीतर ही प्रमाणपत्र मिल रहा है। इसके विपरीत पुराने अधिनियम में न केवल आवेदकों को भौतिक रूप से कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था, बल्कि प्रमाणपत्र जारी करने की कोई निश्चित समय सीमा भी तय नहीं थी।
कुल मिलाकर, समान नागरिक संहिता के लागू होने के बाद उत्तराखंड में विवाह और पारिवारिक पंजीकरण की प्रक्रिया पारदर्शी, तेज़ और नागरिक-अनुकूल बन गई है। डिजिटल माध्यम से हो रहे पंजीकरण न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ कर रहे हैं, बल्कि आम लोगों के लिए भी यह व्यवस्था सुविधाजनक और भरोसेमंद साबित हो रही है।
