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देहरादून: जिस मां ने नौ महीने कोख में रखकर जन्म दिया, वही जब अपने ही बेटों के हाथों प्रताड़ना झेलने लगे और हर रात जान का भय सताने लगे, तब जिला प्रशासन उसके लिए ढाल बनकर खड़ा हुआ। बंजारावाला क्षेत्र की विधवा मां विजय लक्ष्मी पंवार ने हिम्मत जुटाकर जिलाधिकारी कार्यालय में गुहार लगाई कि उसके दोनों बेटे नशे के आदी हैं, आए दिन मारपीट करते हैं, पैसे मांगते हैं और जान से मारने की धमकी देते हैं। वर्षों से सहन कर रही पीड़ा जब असहनीय हुई, तब प्रशासन से न्याय की आस लगाई गई।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल गोपनीय जांच कराई। पड़ोसियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अन्य साक्ष्यों ने मां की व्यथा की पुष्टि की। जांच में सामने आया कि दोनों बेटे नशे की हालत में लगातार उत्पीड़न कर रहे थे, जिससे महिला भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन जीने को मजबूर थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की। कानूनी शिकंजा कसते ही राह से भटके बेटों को पहली बार अपनी मां के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्यों का एहसास हुआ। प्रशासन की सख्ती और संभावित जिला बदर की चेतावनी ने उनके तेवर बदल दिए।

न्यायालय में दोनों बेटों ने मां के पांव गिरकर क्षमा याचना की। उन्होंने शपथ पत्र देकर नशा छोड़ने, हिंसा न करने और भविष्य में मां के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार न करने का वचन दिया। कानून का भय और मां की वर्षों की चुप पीड़ा दोनों ने मिलकर बेटों को झकझोर दिया।

विधवा मां के साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी के मामलों में जिला प्रशासन की कठोर कार्रवाई का असर साफ दिखाई दिया। न्यायालय ने दोनों बेटों के व्यवहार में सुधार और दिए गए शपथ पत्रों को संज्ञान में लेते हुए आगे की कार्रवाई समाप्त कर दी, साथ ही भविष्य में पुनरावृत्ति न होने की कड़ी चेतावनी भी दी।

इस पूरे प्रकरण पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं, विधवाओं और निर्बल वर्ग के उत्पीड़न पर जिला प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। यदि भविष्य में इस तरह की घटना दोहराई गई तो कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।प्रशासन की इस सख्ती से न सिर्फ एक विधवा मां को सुरक्षा और सम्मान मिला, बल्कि यह संदेश भी गया कि कानून की नजर में मां-बाप के साथ दुर्व्यवहार करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।

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