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अल्मोड़ा : माघ माह के प्रथम दिन मकर संक्रांति के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सम्मिलित जागेश्वर धाम में प्राचीन और अद्भुत घृत कमल अनुष्ठान विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान भोलेनाथ शुद्ध गाय के घी से निर्मित दिव्य घृत कमल की गुफा में विराजमान हो गए हैं, जहां वे पूरे माघ माह तक भक्तों को इसी विशेष स्वरूप में दर्शन देंगे।

हजारों वर्षों से चली आ रही इस अलौकिक परंपरा के अनुसार, माघ माह के प्रारंभ में भगवान शिव को शीत ऋतु के दौरान शीत निद्रा में विराजमान माना जाता है। इसी मान्यता के तहत जागेश्वर धाम में शिवलिंग को शुद्ध गाय के घी से निर्मित गुफा से आच्छादित किया जाता है, जिसे ‘घृत कमल’ कहा जाता है। यह दृश्य न केवल आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय सनातन परंपराओं की जीवंत मिसाल भी प्रस्तुत करता है।

मंदिर परिसर में बीते कई दिनों से घृत कमल गुफा के निर्माण की तैयारी चल रही थी। परंपरा के अनुसार, शुद्ध गाय के घी को पहले पानी के साथ पिघलाया जाता है और फिर उसे विशेष विधि से ठंडा कर गुफा जैसी आकृति प्रदान की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में पवित्रता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। गुफा के पूर्ण रूप लेने के बाद वैदिक मंत्रोच्चारण, रुद्राभिषेक और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ शिवलिंग को इस घृत कमल से ढक दिया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि माघ माह भर भगवान शिव इसी स्वरूप में विराजमान रहते हैं और भक्तजन इसी रूप में उनके दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। एक माह की अवधि पूर्ण होने के बाद इस पवित्र घी को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। जन विश्वास के अनुसार, इस प्रसाद के सेवन से अनेक असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। घृत कमल अनुष्ठान के शुभारंभ के साथ ही जागेश्वर धाम में आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण व्याप्त हो गया है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दुर्लभ अनुष्ठान के दर्शन के लिए जागेश्वर पहुंच रहे हैं। मंदिर प्रांगण ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष से गूंज उठा है।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुलिस एवं स्वयंसेवकों की तैनाती के साथ-साथ यातायात और भीड़ प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का यह संगम माघ माह भर जागेश्वर धाम को एक अद्वितीय धार्मिक केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित करता रहेगा, जहां भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों को घृत कमल स्वरूप में दर्शन देकर उनका कल्याण करे।

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