बागेश्वर में ऐतिहासिक उत्तरायणी मेले का भव्य शुभारंभ, मंत्री सौरभ बहुगुणा ने किया दीप प्रज्वलन

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बागेश्वर : बाबा बागनाथ की पावन और ऐतिहासिक भूमि पर आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध उत्तरायणी मेले का शुभारंभ उत्तराखंड सरकार के पशुपालन, दुग्ध विकास एवं कौशल विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने दीप प्रज्वलित कर विधिवत रूप से किया। मेले के उद्घाटन अवसर पर मंचासीन सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं विशिष्ट अतिथियों का बैज अलंकरण एवं शॉल ओढ़ाकर पारंपरिक स्वागत किया गया।

उत्तरायणी मेले के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से जनपदवासियों को संबोधित करते हुए उत्तरायणी पर्व, घुघुतिया पर्व एवं मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तरायणी पर्व हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता का प्रतीक है, जिसे संजोकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। मुख्यमंत्री ने बागेश्वर को पौराणिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण जनपद बताते हुए कहा कि उत्तरायणी मेला स्थानीय संस्कृति, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से सौहार्दपूर्ण व्यवहार, स्वच्छता बनाए रखने तथा मेले को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की अपील की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए सूरजकुंड से मंडलसेरा बाइपास पुल के निर्माण, मंडलसेरा कुंती नाले के निर्माण तथा सूरजकुंड क्षेत्र में घाट निर्माण कराए जाने की घोषणा की, जिस पर उपस्थित जनसमूह ने तालियों के साथ स्वागत किया। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा ने अपने संबोधन की शुरुआत “बागनाथ की जय” के उद्घोष के साथ करते हुए जनपदवासियों को उत्तरायणी मेले की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उत्तरायणी पर्व उत्तराखंड की आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है। इस मेले के माध्यम से कुमाऊँ की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरागत वेशभूषा, लोकनृत्य और लोकगीतों का भव्य उत्सव देखने को मिलता है।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि उत्तरायणी मेला केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका और आर्थिकी को सुदृढ़ करने का भी एक सशक्त माध्यम है। मेले में स्थानीय उत्पादों और विभागीय स्टॉलों के माध्यम से लोग अपनी आजीविका को मजबूत कर रहे हैं और अपनी संस्कृति को नई पहचान दिला रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोग सरकार की विभिन्न योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जनपद बागेश्वर में कीवी उत्पादन निरंतर बढ़ रहा है, जिसे क्लस्टर आधारित मॉडल के माध्यम से और अधिक सशक्त किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जिस दिन जनपद में दुग्ध उत्पादन निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचेगा, उस दिन बागेश्वर में दुग्ध संघ की स्थापना की जाएगी, जिससे दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा।इस दौरान प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा ने मेले में लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टॉलों एवं स्थानीय उत्पादों के स्टॉलों का निरीक्षण भी किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने भी जनपदवासियों और आगंतुकों को उत्तरायणी मेले की बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तरायणी मेला हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, जहां लोग पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लें और इन यादगार पलों को अपनी स्मृतियों में संजोकर रखें।

उत्तरायणी मेले के शुभारंभ के साथ ही बागेश्वर में उत्सव का माहौल देखने को मिला। रंग-बिरंगी लोक संस्कृति, पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच ऐतिहासिक उत्तरायणी मेला एक बार फिर श्रद्धा, उल्लास और परंपरा का संगम बन गया है।

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