नीति आयोग EPI 2024 में उत्तराखंड ने छोटे राज्यों में हासिल किया पहला स्थान
नई दिल्ली/देहरादून : नीति आयोग द्वारा जारी निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 में उत्तराखंड ने छोटे राज्यों की श्रेणी में प्रथम स्थान हासिल कर देशभर में अपनी सशक्त पहचान बनाई है। यह उपलब्धि राज्य की निर्यातोन्मुख नीतियों, उद्योग–अनुकूल वातावरण, मजबूत बुनियादी ढांचे और सरकार द्वारा किए गए निरंतर सुधारों का प्रतिफल मानी जा रही है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि नीति आयोग के निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 में शीर्ष स्थान प्राप्त करना उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सफलता राज्य सरकार की उद्योग समर्थक नीतियों, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, सरल कारोबारी प्रक्रियाओं और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाना है। इसके लिए स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, कृषि आधारित वस्तुओं, औषधीय एवं जैविक उत्पादों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे न केवल निर्यात में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था और अधिक सशक्त बनेगी।

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात किसी भी राज्य और देश के आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन होता है। इससे विदेशी मुद्रा अर्जित होती है, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी बढ़ती है और व्यापार घाटे को कम करने में सहायता मिलती है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि उत्तराखंड ने नीति ढांचे, व्यापार सहयोग, बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन और नवाचार जैसे प्रमुख मानकों पर बेहतर प्रदर्शन किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की यह उपलब्धि राज्य को निवेश और औद्योगिक विकास के नए अवसरों की ओर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर रैंकिंग से राज्य में घरेलू और विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी। कुल मिलाकर, निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 में शीर्ष स्थान प्राप्त कर उत्तराखंड ने यह सिद्ध कर दिया है कि संतुलित नीतियों, प्रभावी प्रशासन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के माध्यम से सीमित संसाधनों वाले राज्य भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। यह उपलब्धि न केवल राज्य सरकार के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।
