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बिहार: समस्तीपुर से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े जूनियर क्रिकेट मंच तक पहुंचने वाले 13 वर्षीय सूर्यवंशी ने अंडर-19 विश्व कप फाइनल में ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसने क्रिकेट इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए खिताबी मुकाबले में सूर्यवंशी ने महज 80 गेंदों में विस्फोटक 175 रन बनाकर न केवल मैच का रुख पलट दिया, बल्कि करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का दिल भी जीत लिया।

फाइनल जैसे दबाव भरे मुकाबले में सूर्यवंशी का आत्मविश्वास देखते ही बनता था। उन्होंने अपनी पारी के दौरान 15 चौके और 15 गगनचुंबी छक्के जड़े। मैदान के चारों ओर शॉट्स की बरसात करते हुए उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाजों की एक न चलने दी। तेज गेंदबाज हों या स्पिनर, हर किसी को उन्होंने समान आक्रामकता के साथ खेला और विपक्षी कप्तान के पास कोई जवाब नहीं बचा।

भारत की पारी की शुरुआत भले ही साधारण रही हो, लेकिन सूर्यवंशी के क्रीज पर टिकते ही मुकाबले का रंग बदल गया। उनकी बल्लेबाजी में तकनीक के साथ-साथ गजब की समझ और परिपक्वता साफ झलक रही थी, जो आमतौर पर इतने कम उम्र के खिलाड़ियों में कम ही देखने को मिलती है। उन्होंने न केवल रन बनाए, बल्कि स्ट्राइक रोटेट कर टीम के अन्य बल्लेबाजों को भी आत्मविश्वास दिया।

सूर्यवंशी की इस ऐतिहासिक पारी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड के सामने विशाल स्कोर खड़ा किया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लिश टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखी और भारतीय गेंदबाजों ने इसका पूरा फायदा उठाया। अंततः भारत ने मुकाबला जीतकर अंडर-19 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया, लेकिन इस जीत के सबसे बड़े नायक सूर्यवंशी ही रहे।

बिहार जैसे राज्य से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकना सूर्यवंशी के लिए आसान नहीं था। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखा। स्थानीय कोचों और परिवार के सहयोग से उन्होंने अपनी प्रतिभा को निखारा और आज वही मेहनत विश्व मंच पर रंग लाई है।

मैच के बाद सूर्यवंशी ने कहा कि यह पारी उन्होंने देश के लिए खेली और उनका सपना आगे चलकर भारतीय सीनियर टीम के लिए खेलना है। उनके इस जज़्बे और प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, जरूरत होती है सही दिशा, मेहनत और आत्मविश्वास की।

13 साल की उम्र में विश्व कप फाइनल में 175 रन की पारी खेलना न केवल एक रिकॉर्ड है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी। सूर्यवंशी आज सिर्फ समस्तीपुर या बिहार के नहीं, बल्कि पूरे भारत के गौरव बन चुके हैं। क्रिकेट जगत को अब इस नन्हे सितारे से भविष्य में और भी बड़ी पारियों की उम्मीद है।

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