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ऋषिकेश : ऋषिकेश में वनों की सुरक्षा एवं वन्यजीव संरक्षण को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में वन विभाग के फ्रंटलाइन स्टाफ के लिए एक विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न रेंजों से आए वन रक्षक, वन दरोगा और अन्य फील्ड स्टाफ सक्रिय रूप से प्रतिभाग कर रहे हैं।कार्यक्रम का उद्घाटन वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया गया। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वन विभाग का फ्रंटलाइन स्टाफ जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए वन संपदा की सुरक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में उनका प्रशिक्षित, सक्षम और सतर्क होना बेहद आवश्यक है, ताकि वे बदलती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों को वनाग्नि नियंत्रण, वन्यजीव संरक्षण, अवैध कटान और तस्करी की रोकथाम, आपदा प्रबंधन तथा कानून व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही पुलिस विभाग के अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा उन्हें फील्ड में कार्य करते समय सुरक्षा उपाय, आत्मरक्षा तकनीक, टीम वर्क और आधुनिक उपकरणों के प्रभावी उपयोग का भी प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

इस अवसर पर पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के उपमहानिरीक्षक यशवंत सिंह ने कहा कि वन विभाग के फ्रंटलाइन कर्मचारी जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा की पहली पंक्ति में खड़े रहते हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर कार्य करने, कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और आपात स्थितियों में त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई करने में सक्षम बनाते हैं। वहीं, नरेंद्रनगर वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी दिगंत नायक ने कहा कि वन विभाग का फ्रंटलाइन स्टाफ जंगलों की सुरक्षा की रीढ़ है। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम कर्मचारियों की क्षमता, दक्षता और आत्मविश्वास में वृद्धि करते हैं, जिससे वे वन अपराधों की रोकथाम, वनाग्नि नियंत्रण और वन्यजीव संरक्षण के कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकें।

प्रशिक्षण की एक विशेषता यह भी है कि इसमें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अभ्यास (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने और त्वरित कार्रवाई करने का अनुभव मिलेगा। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल कर्मचारियों की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत करते हैं। इससे वे अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगे और वन संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें विभिन्न विषय विशेषज्ञ प्रतिभागियों को मार्गदर्शन देंगे। विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से वन संरक्षण को और मजबूती मिलेगी और वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

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