ऋषिकेश में 9 मार्च से शुरू होगा अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव

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ऋषिकेश : गंगा तट पर स्थित परमार्थ निकेतन की पावन भूमि एक बार फिर विश्व को योग, ध्यान और आध्यात्मिकता की अमूल्य धरोहर से जोड़ने के लिए तैयार है। हिमालय की गोद में बसे इस दिव्य आश्रम में इन दिनों योग साधना, ध्यान की गहराई और मंत्रों की पवित्र ध्वनि गूंज रही है। सम्पूर्ण आश्रम का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता से परिपूर्ण दिखाई दे रहा है।परमार्थ निकेतन में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का शुभारम्भ 9 मार्च से होने जा रहा है। महोत्सव को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और अब तक विश्व के 40 से अधिक देशों से योगप्रेमी, साधक और आध्यात्मिक जिज्ञासु ऋषिकेश पहुंच चुके हैं।

इस अवसर पर गंगा आरती के दौरान आध्यात्मिक गुरु स्वामी परमहंस योगानंद की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई और इसी के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के पंजीकरण का औपचारिक शुभारम्भ भी किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से वैश्विक योग चेतना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि स्वामी परमहंस योगानंद ने योग, ध्यान और आत्मसाक्षात्कार के दिव्य संदेश के माध्यम से न केवल भारत की सनातन आध्यात्मिक परम्परा को विश्व तक पहुंचाया, बल्कि पूर्व और पश्चिम को आध्यात्मिक चेतना के एक सूत्र में जोड़ने का महान कार्य किया। उन्होंने कहा कि योगानंद जी की शिक्षाएं आज भी लाखों लोगों को ध्यान, साधना और आत्मचिंतन के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

उन्होंने बताया कि स्वामी परमहंस योगानंद का संदेश स्पष्ट था कि सच्चा सुख और शांति बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि मनुष्य के अपने भीतर निहित होती है। उनकी शिक्षाओं ने अनगिनत साधकों को आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में अग्रसर किया है।अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव केवल योग आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित, स्वस्थ और जागरूक बनाने की एक समग्र यात्रा है। यहां योग के माध्यम से शरीर को स्वस्थ रखने, ध्यान के माध्यम से मन को शांत करने और आध्यात्मिकता के माध्यम से आत्मा को जागृत करने का संदेश दिया जाता है।

परमार्थ निकेतन को केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक विश्वविद्यालय माना जाता है, जहां जीवन को संतुलित और सार्थक ढंग से जीने की कला सिखाई जाती है। यहां आने वाले साधक केवल योग का अभ्यास ही नहीं करते, बल्कि अपने भीतर छिपी दिव्यता को पहचानने की प्रेरणा भी लेकर लौटते हैं।

महोत्सव के दौरान विश्वभर से आए योग गुरु, आध्यात्मिक मार्गदर्शक और विद्वान योग, आयुर्वेद, ध्यान, वेदांत और भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव और ज्ञान साझा करेंगे। विविध सत्रों, कार्यशालाओं और ध्यान साधनाओं के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि योग केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन की एक समग्र पद्धति है।जब अलग-अलग संस्कृतियों, भाषाओं और परम्पराओं से आए लोग एक ही उद्देश्य—आत्मिक शांति और वैश्विक सद्भाव—के लिए एक साथ एकत्र होते हैं, तब यह योग महोत्सव वास्तव में “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को साकार कर देता है।

विश्व के अनेक देशों से आए प्रतिभागी इस बात का प्रमाण हैं कि भारत की प्राचीन योग परम्परा सम्पूर्ण मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है। यह महोत्सव हर क्षण यह संदेश दे रहा है कि यदि मानवता को एकजुट करना है और पृथ्वी पर शांति स्थापित करनी है, तो योग और ध्यान का मार्ग ही सबसे सरल, प्रभावी और सार्वभौमिक मार्ग है।

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