जोशीमठ की जमीन अंदर तक खोखली, जांच में बड़ा खुलासा
चमोली / जोशीमठ : उत्तराखंड के जोशीमठ में लंबे समय से जारी भूधंसाव (लैंड सब्सिडेंस) को लेकर की जा रही वैज्ञानिक जांच में एक बड़ा और चिंताजनक खुलासा सामने आया है। विशेषज्ञों द्वारा की गई हालिया जांच में पाया गया है कि जमीन के भीतर करीब 80 मीटर गहराई तक भी ठोस चट्टान (हार्ड रॉक) मौजूद नहीं है। इस तथ्य ने क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में शामिल वैज्ञानिकों के अनुसार, जोशीमठ का बड़ा हिस्सा ढीली मिट्टी, रेत और पत्थरों के मिश्रण (डिब्रिस) पर बसा हुआ है, जो समय के साथ खिसकने और धंसने के प्रति बेहद संवेदनशील है। यही कारण है कि यहां बार-बार दरारें पड़ने, भवनों के झुकने और सड़कों के धंसने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की भू-संरचना वाले क्षेत्र में भारी निर्माण कार्य, अनियंत्रित शहरीकरण और प्राकृतिक जल निकासी में बाधा जैसी गतिविधियां स्थिति को और अधिक गंभीर बना सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में भूधंसाव की घटनाएं और तेज हो सकती हैं।
प्रशासन ने इस खुलासे के बाद क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया को तेज करने की बात कही है। साथ ही, वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से विस्तृत भू-तकनीकी अध्ययन और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में काम करने का आश्वासन दिया गया है।
गौरतलब है कि जोशीमठ पहले से ही भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। ऐसे में जमीन के भीतर ठोस चट्टान का अभाव इस क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों ने स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सतर्कता बरतने और योजनाबद्ध विकास की आवश्यकता पर जोर दिया है।
