बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए लंदन का एलारा ग्रुप देगा भारत को बड़ा सहयोग
देहरादून/नई दिल्ली : बाल भिक्षावृत्ति जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत लंदन स्थित बहुराष्ट्रीय वित्तीय संस्था एलारा ग्रुप भारत में सहयोग की दिशा में आगे आया है। ग्रुप ने भारत के विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर सड़क पर रहने वाले और भिक्षावृत्ति में धकेले गए बच्चों के पुनर्वास व संरक्षण के लिए दीर्घकालिक साझेदारी की घोषणा की है। सूत्रों के अनुसार, एलारा ग्रुप का यह कदम भारत में बढ़ती बाल भिक्षावृत्ति की समस्या को जड़ से मिटाने के लिए एक व्यापक मिशन का हिस्सा है। संस्था ने न केवल आर्थिक सहयोग देने का प्रस्ताव रखा है बल्कि विशेषज्ञों की एक विशेष टीम भारत भेजने की योजना भी बनाई है, जो जमीनी स्तर पर बच्चों की वर्तमान स्थिति का आकलन कर रणनीति तैयार करेगी।

जानकारी के मुताबिक, योजना के अंतर्गत एलारा ग्रुप उन राज्यों पर प्राथमिकता देगा जहाँ बाल भिक्षावृत्ति के मामले अधिक हैं। सामाजिक संगठनों, स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभागों के साथ समन्वय कर बच्चों की पहचान, उनके परिवारों से संपर्क, शिक्षा से जोड़ना, सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना और कौशल विकास जैसी बहुस्तरीय प्रक्रिया को लागू किया जाएगा।ग्रुप के अधिकारियों ने बताया कि उनका उद्देश्य सिर्फ राहत प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे स्थायी ढाँचे विकसित करना है जिससे भविष्य में कोई बच्चा मजबूरी या माफिया तंत्र के दवाब में भिक्षावृत्ति के लिए सड़क पर न उतरे। इसके लिए एलारा ग्रुप भारत में एक विशेष “चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड” स्थापित करेगा, जो देशभर में चल रही पुनर्वास योजनाओं को वित्तीय और तकनीकी समर्थन देगा।
इसके साथ ही, बाल अधिकारों पर सजगता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। अभियान में स्कूलों, विश्वविद्यालयों, स्वयंसेवी संगठनों और युवाओं की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि समाज में बाल सुरक्षा के प्रति एक मजबूत वातावरण तैयार हो सके।सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एलारा ग्रुप की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के जुड़ने से बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ चल रहे प्रयासों को नई गति और मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना अपने निर्धारित स्वरूप में आगे बढ़ती है तो आने वाले वर्षों में देश में बाल भिक्षावृत्ति की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।
सरकारी एजेंसियों की ओर से भी इस पहल को सकारात्मक संकेत मिला है। अधिकारियों का कहना है कि निजी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का योगदान बाल संरक्षण की राष्ट्रीय नीति को मजबूती देता है और इससे जमीनी बदलाव तेजी से संभव होते हैं।एलारा ग्रुप अगले महीने अपनी अंतिम कार्ययोजना भारत सरकार को सौंपेगा। उम्मीद है कि इस साझेदारी के बाद बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन की दिशा में देशव्यापी और सशक्त रूप लेगी।
